फ्लोराइड पानी का कहर: दूधपनियां गांव में अपंग पिता की दो माह पूर्व मौत के बाद बेटी भी चल बसी
गंगटा पंचायत के दूधपनियां गांव में फ्लोराइडयुक्त पानी के कारण ग्रामीण गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई परिवारों में हालात भयावह हैं। हाल ही में विनोद बेसरा की बेटी ललिता देवी की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। प्रशासन ने राहत का भरोसा दिया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

हवेली खड़गपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के गंगटा पंचायत के दूधपनियां गांव में फ्लोराइडयुक्त पानी का कहर लगातार लोगों की जिंदगी निगल रहा है। शुद्ध पेयजल और समुचित इलाज के अभाव में ग्रामीण अपंगता और गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कई परिवारों में हालात इतने भयावह हैं कि लोग खाट पर पड़े-पड़े जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे हैं।
स्थायी समाधान की कमी
इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। हालांकि जिलाधिकारी की पहल पर पीएचईडी विभाग को विशेष निर्देश दिया गया था और उन्हें शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फ्लोराइडयुक्त चापाकल को हटाकर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जिससे कुछ हद तक ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है लेकिन फ्लोराइड से पीड़ित की कोई सुध नहीं ली गई। ऐसे में गांव में फ्लोराइड पीड़ित परिवारों की स्थिति फिर चर्चा में आ गई है।
भयावह स्थिति
दो माह पूर्व विनोद बेसरा की मौत के बाद गुरुवार को उनकी फ्लोराइड पीड़ित 30 वर्षीय अपंग बेटी ललिता देवी ने भी दम तोड़ दिया। जबकि मृतक विनोद बेसरा का एक पुत्र भी अपंग है। एक ही परिवार में पिता और बेटी की लगातार हुई मौत ने प्रशासनिक दावों और आश्वासनों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से गांव में फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से अपंग व्यक्ति और परिवारों की कोई सुध नहीं लिया जा रहा है।
प्रशासनिक दौरा और आश्वासन
गौरतलब है कि 7 जनवरी को जिलाधिकारी निखिल धनराज निपनिकर दूधपनियां गांव पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी थीं तथा विशेष नीति के तहत राहत और सहायता देने का भरोसा भी दिलाया था। गांव में कैंप लगाकर स्वास्थ्य जांच और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की बात कही थी। डीएम के नेतृत्व में शिविर भी लगा लेकिन समय बीतने के साथ प्रशासनिक सक्रियता ठंडी पड़ गई और पीड़ित परिवार को अपने हाल पर छोड़ दिए गए।
ग्रामीणों की चिंताएं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल औपचारिक दौरे और आश्वासन तक सीमित है। गंभीर रूप से प्रभावित लोगों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में लगातार हो रही मौतों से गांव में भय और निराशा का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और भी परिवार इस त्रासदी का शिकार होंगे। गुरुवार को विनोद बेसरा की बेटी ललिता की मौत की खबर के बाद पूर्व मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल के ने मृतक के आश्रितों को अपने निजी कोष से 2000 की आर्थिक सहायता प्रदान किया।
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