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फोरलेन बनने के कारण सैकड़ों एकड़ में अब भी फंसा हुआ है गंगा का पानी

फोरलेन बनने के कारण सैकड़ों एकड़ में अब भी फंसा हुआ है गंगा का पानी

संक्षेप:

बरियारपुर में फोरलेन निर्माण के कारण किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जल जमाव के कारण खेतों में गंगा का पानी फंसा हुआ है, जिससे दलहन और अन्य फसलों की बुआई में देरी हो रही है। किसानों का कहना है कि पानी के सूखने में एक महीने से अधिक समय लग सकता है।

Nov 12, 2025 12:18 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुंगेर
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बरियारपुर। निज संवाददाता बरियारपुर में विकास के लिए फोरलेन का निर्माण तो हुआ लेकिन इसके निर्माण से इस क्षेत्र के किसानों की मुसीबतें बढ़ गयीं। गंगा का पानी अब भी सैकड़ों एकड़ खेतों में फैला हुआ है। जल जमाव के कारण अब तक अब तक खेतों की जुताई तक नहीं हो पायी है। जबकि नवंबर महीने का दूसरा सप्ताह भी अब बीतने को है। समय पर फसल की बुआई नहीं होने से किसानों को अब चिंता सताने लगा है कि इस बार दलहन सहित अन्य फसल को उपज नहीं हो सकेगा। फोरलेन के कारण फंसा है बाढ़ का पानी बरियारपुर से भागलपुर की तरफ जाने वाली फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है।

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खेतों के बीचोबीच फोरलेन के निर्माण होने से सैकड़ों एकड़ खेतों में अब भी जलजमाव हैं। गंगा का पानी बरियारपुर प्रखंड की सभी पंचायतों में घुसा था। लेकिन कई पंचायतों के खेतों से गंगा का पानी निकल गया। लेकिन इस बार कई पंचायतों के खेतों में गंगा का पानी अब भी फंसा हुआ हैं । फोरलेन का निर्माण होने से खेतों से जल निकासी नहीं हो पा रहा हैं। किस किस जगह है पानी का जमाव बरियारपुर प्रखंड के बहादुरपुर , मिर्जाचक , नीरपुर, बैरेल, घोरघट, आदि बहियार में अब भी पानी का जमाव है। सबसे अधिक पडिया और बहादुर पुर , नीरपुर आदि बहियार में पानी जमाव हैं। जल जमाव के कारण खेत अब तक सुख नहीं पाया हैं । खेतों में करीब दो से चार फीट तक पानी का जमाव है। सबसे अधिक पानी का जमाव फोरलेन का किनारे हैं। फोरलेन निर्माण होने के कारण गंगा का पानी पूरी तरह फंस गया हैं। कुछ कुछ दूरी पर पुल बनाया गया है लेकिन जमीन का लेवल उस पुल के लेवल से ऊंचा हैं। बाढ़ के समय में पानी बढ़ने पर गंगा का पानी घुस गया लेकिन जब पानी घटा तो अब तक गंगा का पानी खेतों में फंसा हुआ हैं। कब है बुआई का समय दलहन फसल के बुआई का समय अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक ही हैं। वहीं गेहूं और सरसों का फसल की बुआई का समय नवंबर महीने के प्रथम सप्ताह तक ही रहता है। समय पर खेतों में बुआई करने से फसल का उपज अच्छा होता है। कीड़े लगने की भी खतरा कम रहता हैं। लेकिन समय पर बुआई नहीं होने से सही मात्रा में उपज नहीं हो पाता हैं। क्या कहते हैं किसान मिर्जाचक के किसान अवधेश कुमार, मुकेश कुमार , बहादुरपुर के किसान नीरज कुमार, सुबोध कुमार, अरुण मंडल , नीरपुर के किसान गोपी मंडल, ललित मंडल, प्रकाश मंडल आदि ने कहा कि फोरलेन सड़क बनने के कारण खेतों में गंगा का पानी का जमाव हैं। किसानों ने कहा कि जल निकासी के लिए पुल का निर्माण दूर दूर पर किया गया हैं। पुल का लेबल खेत के जमीन के लेबल से ऊंचा है। गंगा का पानी अब तक खेतों में जमाव है। किसानों ने कहा कि खेतों में दलहन, तेलहन और रबी फसल की बुआई करने में काफी विलंब हो रहा है। समय पर बुआई नहीं होने से फसल का उपज भी नहीं हो सकेगा। किसानों ने कहा कि खेतों से पानी सूखने में अब भी एक महीने से अधिक समय लग सकता है।