सती के त्याग और शिव के प्रेम की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
मुंगेर के तौफिर गांव में श्री विष्णु विशाल महायज्ञ के दूसरे दिन भक्तिमय माहौल में साध्वी विजया लक्ष्मी शास्त्री ने माता सती की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे सती ने भगवान शिव को पति के रूप में वरण किया और अपने पति के अपमान को सहन न कर पाने के कारण योगाग्नि में शरीर त्याग दिया।

मुंगेर, निज प्रतिनिधि। सदर प्रखंड के मय पंचायत अंतर्गत तौफिर गांव में आयोजित श्री विष्णु विशाल महायज्ञ के दूसरे दिन कथा का माहौल भक्तिमय हो गया। मथुरा से पधारीं कथावाचिका साध्वी विजया लक्ष्मी शास्त्री ने अपने प्रवचन में शिव पुराण में वर्णित माता सती की कथा की विस्तार से चर्चा की। साध्वी ने बताया कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती ने भगवान शिव को पति रूप में वरण किया, जो दक्ष को स्वीकार नहीं था। दक्ष ने विशाल यज्ञ किया पर शिव-सती को आमंत्रित नहीं किया। पिता के यज्ञ में जाने की इच्छा से सती बिना बुलावे पहुंचीं, जहां दक्ष ने भगवान शिव का घोर अपमान किया।
पति का अपमान सह न सकीं सती ने योगाग्नि में अपना शरीर त्याग दिया।उन्होंने कहा कि सती का त्याग स्त्री के पतिव्रत धर्म और स्वाभिमान का प्रतीक है। शिव के तांडव, वीरभद्र द्वारा यज्ञ विध्वंस और विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से सती के 51 टुकड़े करने की कथा सुनाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। साध्वी ने कहा कि जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। अगले जन्म में सती ने ही हिमालय पुत्री पार्वती बनकर पुनः शिव को प्राप्त किया।-------------------
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