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24 अक्तूबर, 2020|5:32|IST

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छठी पूजा की देर रात में रचाई गई देवी की शादी

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नवरात्रा के अवसर पर बड़ी दुर्गा महारानी (मोहनगंज) तारापुर दुर्गा मंदिर में बंगला पद्धति के अनुसार छठी पूजा गुरुवार की रात लगभग 10 बजे माता दुर्गा की शादी पूरे विधि विधान के साथ रचाई गई।

जानकारी के अनुसार दुर्गा की शादी रचाई जाने की परंपरा स्थापना काल से ही चली आ रही है। रात्रि 10 बजे शादी की रस्म शुरू की गई। खोगेंद्र चंद्र घोष ने बताया कि दुर्गा की शादी भगवान शिव के साथ रचाई जाती है। धर्म शास्त्र के अनुसार पुरोहित केले का थंब एवं पान के पत्ते लेकर मंदिर परिसर के गर्भ गृह में बैठते हैं। इस विवाह में लगभग चार घंटे का समय लगता है। इसी दौरान गांव की ग्रामीण महिलाएं द्वारा विवाह गीत प्रारंभ होती है। शादी की रस्म पूरी होने के बाद सप्तमी पूजा के 12 बजे दिन में डोला पर दुर्गा देवी को स्नान कराने को लेकर लोग बदुआ नदी के किनारे पहुंच कर रस्म पूरी करने के बाद वापस दुर्गा मंदिर पहुंचते हैं। तब जाकर गर्भ गृह में वेदी पर दुर्गा महारानी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

मोहनगंज:विसर्जित प्रतिमा का मेढ़ लौटने की मान्यता

सप्तमी पूजा की रात्रि 08 बजे के बाद दुर्गा मां का पट श्रद्धालुओं के दर्शन को लेकर खोला जाता है। बताया जाता है कि दसवीं की रात में ही दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन बदुआ नदी में किया जाता है। पुरोहितों का मानना है कि मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन नहीं बल्कि ससुराल के लिए विदा किया जाता है। बड़ी दुर्गा मोहनगंज में विसर्जित प्रतिमा का मेढ़ लौटने की मान्यता यह भी है कि ससुराल से फिर दुर्गा मां को नैहर लाया गया। उस दिन मेढ़पति द्वारा विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। जहां श्रद्धालुओं के लिए उस दिन पूजा वर्जित रहता है। विजयादशमी के दिन 10 कुमारी कन्याओं को केले के पत्ते में चूड़ा दही एवं शक्कर खिलाने की

परंपरा भी रही है। नवरात्रा में माता का दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मुरादें माता पूरी करती है।

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  • Web Title:Devi 39 s wedding held in the late night of sixth puja