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25 जनवरी, 2020|1:29|IST

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‘सनातन धर्म से बनेगा विकसित राष्ट्र

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भारत विश्व का हृदय है। इसके अ्त्तितव की रक्षा से ही विश्व का कल्याण संभव है। आज कैसी विडंबना है कि हिन्दु के संरक्षक भी अपने को धार्मिक कहने से परहेज कर रहे हैं। यह बातें गुरुवार को पुरी मठ के 145 वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने मंुगेर में आयोजित सनातन धर्म सम्मेलन में कही।

धर्म से दूर होने पर सुख की अनुभूति नहीं कर सकते: उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का अंत है जिसका आदि और अंत न हो। इसकी उपयोगिता हर समय, काल, परिस्थिति में होता आ रहा है।

आधुनिक समाज के लोग कहते हैं, अमुक वस्तु पुरानी हो गयी। उसे छोड़ दूसरी वस्तु अपना लेते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात है पृथ्वी, जल, सूर्य, बह्म भी पुराने हैं, इसे क्या आप छोड़ सकते हैं। इसका कोई विकल्प है। इसलिए सनातन पंरपरा की मान बिंदुओ की रक्षा के लिए गहन चिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज धर्म शब्द सुनकर लोग चौक जाते हैं। धर्म के प्रति अनास्था कैसे हुई इसे समक्षे। धर्म से दूर होने पर सुख की कल्पना नहीं कर सकते हैं। सनातन धर्म बचेगा तो मानव का कल्याण होगा। विश्व में शांति रहेगी और भारत पुन: विश्व गुरु बनेगा। इसके लिए भारत में धर्म नियंत्रित, पक्षपात विहिन, शासन तंत्र की जरूरत है। शंकराचार्य ने कहा कि धर्म के सनातन स्वरूप को अपनाने की जरूरत है। सनातन परंपरा में सबकी जीवीका सुरक्षित है। आरक्षण वैमनष्यता फैलाती है। इसमें कई दोष हैं।

शंकराचार्य के पादुका का नगर में कराया गया भ्रमण: पूरी के शंकराचार्य स्वमी निश्चलानंद सरस्वती के चांदी के पादुका को एक ट्राली पर रखकर नगर भ्रमण कराया गया। नगर भ्रमण में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। जगह-जगह लोगों ने पादुका के सामने शीश नवाए। नगर भ्रमण के बाद पादुका कार्यकर्म स्थल पर पहंुचा।

विज्ञान को चुनौती के रूप में लें

स्वामीजी ने कहा कि जीवन एक प्रयोगशाला है। पांच ज्ञाने्द्रिरयां है। जो वस्तु अपने से अधिक उपयोगिता वाली वस्तु उत्पन्न करने में असमर्थ है वह अंतिम तत्व नहीं है। विज्ञान को इसे एक चुनौती के रूप में लेनी चाहिए। उन्होंने कहा नासा के वैज्ञानिक भी उनके आश्रम में आते हैं और किसी विषय पर हो रही शंका का सामाधान करते हैं।

कार्यक्रम स्थल मंगलमर्ति पैलेस बेलन बाजार शंकराचार्य के आते ही अखंड भारत, धर्म की जय, अधर्म का नाश व गौ रक्षा के नारे लगे।

शंकराचार्य ने गोविंद जय-जय गोपाल कृष्ण जय भजन गाया तो उनके साथ लोग भी गा उठे। कार्यक्रम के संयोजक राजेश कुमार मिश्रा, सह संयोजक प्रो. सुधीर कुमार, राजकुमार खेमका, अशोक पटेल, कोषाध्यक्ष शंकर गुप्ता, सह कोषाध्यक्ष ललन ठाकुर, शुभाकंर झा, डा. सुनील सिंह आदि मौजूद थे।

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