
जमीन अधिग्रहण नहीं, तारापुर में व्यवहार न्यायालय का निर्माण अटका
तारापुर में व्यवहार न्यायालय की स्थापना का सपना अब भी अधूरा है। 18 माह पहले न्यायालय के लिए जमीन का चयन किया गया था, लेकिन अधिग्रहण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। इसके कारण हजारों लोग 55 किलोमीटर दूर मुंगेर कोर्ट जाने को मजबूर हैं, जिससे समय और लागत का नुकसान हो रहा है।
तारापुर,राहुल कुमार/निज संवाददाता। तारापुर में व्यवहार न्यायालय की स्थापना का सपना अब भी अधूरा है। करीब 18 माह पहले जिस जमीन को न्यायालय निर्माण के लिए अंतिम रूप से चिन्हित किया गया था, उसका न तो अधिग्रहण हो सका और न ही विभागीय स्तर पर कोई ठोस प्रगति दिखाई दे रही है। परिणामस्वरूप न्यायिक कार्यों से जुड़े हजारों लोगों को आज भी 55 किलोमीटर दूर मुंगेर कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पिछले वर्ष 8 जून को जिला न्यायाधीश आलोक कुमार गुप्ता ने एडीजे अविनाश कुमार और रजिस्टार रत्नेश कुमार द्विवेदी के साथ सोनडीहा मौजा स्थित चिन्हित भूखंड का निरीक्षण किया था।

निरीक्षण के दौरान भवन निर्माण विभाग मुंगेर के कार्यपालक अभियंता नीतेश कुमार, एसडीओ तारापुर राकेश रंजन कुमार, सीओ संतोष कुमार और अन्य अधिकारी मौजूद थे। जिला न्यायाधीश ने मौके पर ही निर्देश दिया था, कि जमीन की मापी कर एक सप्ताह के भीतर भू-अर्जन विभाग को पूरी रिपोर्ट भेजी जाए, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रारंभ होकर न्यायालय भवन का निर्माण शीघ्र शुरू कराया जा सके। निरीक्षण के दौरान न्यायालय भवन के लिए तारापुर- खड़गपुर रोड से सटे उत्तरी दिशा की भूखंड को उपयुक्त माना गया था, जबकि न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण के लिए पावर ग्रिड से दक्षिण दिशा की जमीन का चयन किया गया था। सड़क, गार्ड रूम और अन्य आवश्यक संरचनाओं का खाका भी तैयार करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही सीओ तारापुर को आम सूचना जारी करने का आदेश भी दिया गया था, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया में बाधाएं न आएं। इसके बावजूद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। तारापुर, संग्रामपुर, असरगंज प्रखंडो के लोग हर पेशी,आदेश,जमानत या आवेदन के लिए मुंगेर कोर्ट की 55 किलोमीटर दूरी तय करते हैं। इससे न केवल परिवहन लागत,समय की बर्बादी और लगातार होने वाली असुविधों से आम जनमानस में नाराजगी है। बोले स्थानीय लोग तारापुर में व्यवहार न्यायालय नहीं होने से न केवल न्यायिक कार्यों में देरी का कारण है,बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक ढांचे पर भी व्यापक प्रभाव डाल रही है। राजेश कुमार सिंह,अध्यक्ष विधिज्ञ संघ,तारापुर ------ जमीन चिन्हित होने के बाद भी अधिकारियों की उदासीनता और फाइलों के जटिल चक्र में फंसा यह प्रोजेक्ट आज भी वहीं खड़ा है,जहां 18 महीने पहले था। अनिल कुमार सिंह,महासचिव विधिज्ञ संघ,तारापुर --------------------- प्रशासन और विभागीय तंत्र फुर्ती दिखाए,ताकि तारापुर के लोगों को न्याय की तलाश में 55 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय मुंगेर न जाना पड़े। हरे कृष्ण वर्मा,पूर्व अध्यक्ष विधिज्ञ संघ,तारापुर। --------- व्यवहार न्यायालय केवल एक भवन नहीं,बल्कि आम जनता के अधिकार,न्याय और भरोसे का प्रतीक है। यह प्रतीक तारापुर में भी जल्द साकार होना चाहिए। पुष्पेंद्र कुमार सिंह,पूर्व प्राचार्य आरएस कॉलेज, तारापुर। ---------------- बोले अधिकारी तारापुर व्यवहार न्यायालय के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाई है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। पंकज गुप्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, मुंगेर।

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