जिला संयुक्त औषधालय बदहाल, आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के लिये महज 4 चिकित्सक
के लिये महज 4 चिकित्सक किराये के जर्जर भवन से सीमित संसाधनों में चल रहा काम, चिकित्सकों एवं कर्मियों की कमी, दवाओं का अभाव और बुनियादी सुविधाओं की हो

मुंगेर, एक संवाददाता। जिला स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित जिला संयुक्त औषधालय, मुंगेर देशी चिकित्सा विभाग की स्थिति जिले में बेहद चिंताजनक बनी हुई है। आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक एवं देसी चिकित्सा पद्धतियों की सुविधा लोगों को देने और इन पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित यह औषधालय वर्तमान में किराये के पुराने एवं जर्जर भवन में रोजगार संचालित हो रहा है, जहां न तो पर्याप्त जगह है और न ही बुनियादी सुविधा उपलब्ध है। 4 चिकित्सकों के सहारे पूरा औषधालय: जानकारी के अनुसार, पूरे औषधालय का संचालन महज 4 चिकित्सकों के सहारे किया जा रहा है।
आयुर्वेदिक और यूनानी विभाग में तो केवल एक-एक चिकित्सक ही पदस्थापित हैं। जबकि, होम्योपैथ में प्रभारी सहित 2 चिकित्सक कार्य कर रहे हैं। चिकित्सकों की यह कमी न केवल विभागीय कार्यों को प्रभावित कर रही है, बल्कि मरीजों को भी समुचित इलाज से वंचित होना पड़ रहा है। औषधालय से मिली जानकारी के अनुसार इस औषधालय में सहायक कर्मियों की भी कमी है। यहां केवल एक प्रधान सहायक कार्यरत हैं, जो सप्ताह में मात्र तीन दिन ही मुंगेर में उपस्थित रहते हैं। शेष दिनों में वे जमुई में प्रतिनियुक्त रहते हैं, जिससे इस औषधालय के कार्यालय संबंधी कार्यों में लगातार विलंब और अव्यवस्था बनी रहती है। चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी नहीं, चिकित्सक कर रहे झाड़ू-पोंछा: इस औषधालय में सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि, यहां एक भी चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी पदस्थापित नहीं है। परिणामस्वरूप चिकित्सकों को ही औषधालय की साफ-सफाई जैसे कार्य करने पड़ रहे हैं, जो उनके मूल दायित्वों से इतर है। चिकित्सालय खुलने के बाद कार्यालय का झाड़ू आदि लगाने का काम भी स्वयं इन्हीं के द्वारा किया जाता है। दो वर्षों से दवाइयों का संकट: यहां से मिली जानकारी के अनुसार, होम्योपैथी विभाग को छोड़कर यूनानी और आयुर्वेदिक विभाग में पिछले लगभग दो वर्षों से दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। अब केवल यहां होम्योपैथिक के मरीज ही इलाज करने आते हैं। दवा के अभाव में आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा विभाग में मरीजों का आना लगभग बंद हो गया है। चिकित्सकों का कहना है कि, पहले यहां मरीजों की भीड़ रहती थी, लेकिन अब यहां मरीज मुश्किल से ही दिखाई ही नहीं देते हैं, क्योंकि बिना दवा के इलाज संभव नहीं है। उपेक्षा का शिकार आयुष चिकित्सा: कुल मिलाकर, मुंगेर का जिला संयुक्त औषधालय, मुंगेर, देशी चिकित्सा विभाग संसाधनों, मानव बल और प्रशासनिक ध्यान के अभाव में बदहाली का शिकार है। यदि शीघ्र ही भवन, स्टाफ और दवाईयों की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह औषधालय देशी चिकित्सा के नाम पर मात्र खानापूर्ति बनकर ही सीमित रह जाएगा। कहते हैं चिकित्सक: जिला संयुक्त औषधालय, मुंगेर, देशी चिकित्सा विभाग की स्थिति के संबंध में वरीय अधिकारियों को जानकारी है। यह औषधालय वर्षों से इसी भवन में चल रहा है और विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है। दबाव एवं कर्मियों की कमी सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या को लेकर विभाग द्वारा ही कुछ किया जा सकता है। -डॉ अजय कुमार, आयुर्वेद विभाग, जिला संयुक्त औषधालय, मुंगेर

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