मुंगेर के शिक्षा विभाग में कमीशनखोरी चरम पर

हिन्दुस्तान, मुंगेर
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मुंगेर, एक संवाददाता। इन दिनों जिले के विभिन्न प्रखंडों के शिक्षा विभाग के कार्यालय

मुंगेर के शिक्षा विभाग में कमीशनखोरी चरम पर

मुंगेर, एक संवाददाता। इन दिनों जिले के विभिन्न प्रखंडों के शिक्षा विभाग के कार्यालय के साथ-साथ जिला शिक्षा विभाग में कमीशनखोरी चरम पर है। विभागीय लिपिक एवं वेतन बनाने वाले शिक्षक कमीशन खोरी में लिप्त हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों के एरियर भुगतान का मामला हो अथवा ईपीएफ की राशि शिक्षकों के खाते में भेजने का मामला हो तो बिना 10 प्रतिशत कमीशन लिए शिक्षकों का काम नहीं होता है। मामला जिले के अन्य प्रखंडों के साथ-साथ मुख्य रूप से खड़गपुर प्रखंड के शिक्षा विभाग के कार्यालय से जुड़ा हुआ है।

इस संबंध में बिहार विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिला शिक्षा विभाग एवं प्रखंड शिक्षा विभाग पर शिक्षकों के हितों की अनदेखी करने के साथ-साथ शिक्षकों का अनावश्यक आर्थिक शोषण करने पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि, जिले के विभिन्न प्रखंडों के कार्यालयों में प्रतिनियोजित बिल बनाने वाले शिक्षक एवं जिला शिक्षा विभाग में नियुक्त लिपिक के द्वारा शिक्षकों के प्रशिक्षित वेतनमान के अंतर वेतन की राशि एवं डीपीई के एरियर भुगतान करने के मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। शिक्षकों के प्रशिक्षित वेतनमान के एरियर का बिल बनाने में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में प्रतिनियोजित शिक्षक एवं जिला शिक्षा विभाग में कार्यरत विभागीय लिपि संयुक्त रूप से मिलकर शिक्षकों का आर्थिक एवं मानसिक शोषण कर रहे हैं।

विशेष रूप से हवेली खड़गपुर प्रखंड के शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में समेकित रूप से शिक्षकों का बकाया एरियर का बिल उपलब्ध करवाने के बाद भी चयनित एवं चिन्हित शिक्षकों का ही एरियर भुगतान किया जा रहा है। वहीं, डीपीई उत्तीर्ण शिक्षकों के एरियर भुगतान में वेतन बनाने वाले शिक्षक एवं विभागीय लिपिक के द्वारा 10 प्रतिशत राशि कमीशन के रूप में मांग की जा रही है। यही नहीं, जिला शिक्षा विभाग के लिपिक के द्वारा शिक्षकों को आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए बारी-बारी से उन्हें कार्यालय बुलाया जा रहा है। जो शिक्षक कार्यालय नहीं जा पाते हैं उनका बिल गुम होने की बात बताकर विभागीय लिपिक अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

उन्होंने कहा है कि, जिले के सभी प्रशिक्षित शिक्षकों के एरियर का बिल समेकित रूप से तीन बार जिला शिक्षा विभाग कार्यालय को उपलब्ध कराया गया है। इसके बावजूद अभी तक सभी शिक्षकों के एरियर का भुगतान नहीं हो पाना भ्रष्टाचार की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करता है। इतना ही नहीं, ईपीएफ की राशि भी शिक्षकों के खाते में अपडेट नहीं है। जबकि, यह राशि शिक्षकों के खाते में प्रत्येक माह जमा होनी चाहिए। इस मामले में भी कमीशन खोरी के लिए ही ईपीएफ की राशि कई महीनों तक शिक्षकों के खाते में भेजा नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि, प्रखंड के शिक्षकों में आक्रोश पनप रहा है। जिला शिक्षा विभाग के द्वारा यदि अति शीघ्र शिक्षकों के समस्याओं का निष्पादन नहीं किया गया तो इस मामले में संघ शीघ्र ही जिलाधिकारी से मिलकर शिक्षकों के साथ न्याय करने की गुहार लगाएगा।

कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी:

मेरे पास प्रशिक्षित शिक्षकों के एरियर भुगतान से संबंधित कोई फाइल बचा हुआ नहीं है। मेरी जानकारी में लगभग सभी प्रशिक्षित शिक्षकों के एरियर का भुगतान हो चुका है। यदि अभी भी कुछ ऐसे शिक्षकों के एरियर का भुगतान नहीं हुआ है तो वे समेकित रूप से एरियर का बिल कार्यालय को उपलब्ध कराएं। इस संबंध में एक बार फिर से विभिन्न प्रखंड कार्यालय को निर्देश जारी किया जाएगा। जहां तक एरियर भुगतान के बदले कमीशन अथवा घूसखोरी की बात है, तो इस संबंध में शिक्षक अथवा शिक्षक संघ कार्यालय को आवेदन दे एवं मुझसे मिले। आरोप की जांच की जाएगी और जांच में आरोप सही साबित होने पर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

-- शैलेंद्र कुमार, डीपीओ स्थापना, जिला

शिक्षा विभाग, मुंगेर

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