Hindi NewsBihar NewsMunger NewsContaminated Water Supply Raises Concerns in Munger After Indore Incident
शहरी क्षेत्र में फिल्टर होकर घरों में सप्लाई होता है पीने का पानी

शहरी क्षेत्र में फिल्टर होकर घरों में सप्लाई होता है पीने का पानी

संक्षेप:

इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत के बाद मुंगेर के लोग शुद्ध पेयजल की आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। नगर निगम ने 45 वार्ड में से 32 वार्ड के 38,500 घरों में अमृत योजना के तहत शुद्ध पानी की आपूर्ति की है। हालाँकि, कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

Jan 03, 2026 01:01 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुंगेर
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मुंगेर, निज संवाददाता । इंदौर में सप्लाई वाला दूषित पानी पीने के कारण हुई मौत की घटना के बाद शहर के लोग शुद्धपेयजल आपूर्ति को लेकर परेशान हैं। हालांकि हिन्दुस्तान टीम ने शुक्रवार को कस्तूरबा वाटर वर्क्स से शहरी क्षेत्र के घरों में होने वाली शुद्धपेयजल आपूर्ति का जायजा लिया। नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत 45 वार्ड में से 32 वार्ड के 38500 घरों में ही फिलहाल अमृत योजना के तहत शुद्ध पेयजल की सप्लाई हो रही है। जो बिल्कुल फिल्टर और शुद्ध है। जबकि 13 वार्ड में पीएचईडी द्वारा पानी की सप्लाई की जानी है, जो परियोजना फिलहाल टेंडर की प्रक्रिया में है।

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शहर में पानी सप्लाई करने वाली जेएमसी एजेंसी द्वारा शहरी क्षेत्र के 32 वार्ड में गंगा के पानी को कस्तूरबा वाटर वर्क्स में बने 34 एमएलडी के 2 ट्रीटमेंट प्लांट में फिल्टर किया जाता है। फिल्टर करने के पश्चात शहर में 5 स्थानों पर बने जलमीनार में भेजा जाता है। जलमीनार के सहारे सभी घरों में पाइप लाइन के माध्यम से घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति होती है। करीब एक वर्ष पूर्व कस्तूरबा वाटर वर्क्स के एक पुराने प्लांट में मृत जानवर का अवशेष पाए जाने की खबर अखबार में सुर्खियां बनी थी। महापौर कुमकुम देवी बताती है कि उस घटना के बाद पुराने 2 प्लांट में से 1 प्लांट से पेयजल की आपूर्ति बंद है, दूसरे पुराने प्लांट से आस पास के 4 वार्ड में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। पुराने प्लांट की सफाई पिछले माह नगर निगम प्रशासन द्वारा कराया गया है। ----- फिटकिरी और क्लोरीन से होता है पानी फिल्टर जेएमसी कंपनी के परियोजना प्रबंधक नीतीश कुमार बताते हैं कि गंगा का पानी कष्टहरणी घाट में लगे जेट्टी मशीन की सहायता से कस्तूरबा वाटर वर्क्स में पहुंचता है। जहां 36 एमएलडी क्षमता का 2 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना है। पहले प्लांट में फिटकिरी से पानी को ट्रीटमेंट करने के पश्चात दूसरे प्लांट में भेजकर क्लोरीन से फिल्टर किया जाता है। ----- डेली होता है पानी का टीडीएस जांच ऑटोमेटिक डब्ल्यूटीपी प्लांट में फिल्टर हुए पानी की डेली टीडीएस जांच की जाती है। इसके पश्चात शुद्ध पेयजल को शहर में बने 5 जलमीनार में पाइप के सहारे भेजा जाता है। जलमीनार से शहर के 32 वार्ड में कहीं एक टाइम तो किसी वार्ड में 2 टाइम पानी की सप्लाई पाइप लाइन के सहारे होती है। इसके अलावा ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई भी नियमित अंतराल पर कराई जाती है। ------ सीवरेज और जलापूर्ति का पाइप लाइन अलग परियोजना प्रबंधक के अनुसार समूचे शहर में पानी का पाइप लाइन और सीबरेज का पाइप लाइन बिल्कुल अलग- अलग है। सीबरेज का पाइप लाइन 7 फीट नीचे से गया है। जबकि पेयजलापूर्ति का पाइप लाइन कहीं 3 फीट तो कहीं 4 फीट नीचे से ही गुजरा है। ऐसे में सीबरेज से पेयजलापूर्ति के पाइप लाइन का क्रास कनेक्शन भी संभव नहीं है। ---- नियमित अंतराल पर प्लांट की सफाई नगर निगम प्रशासन का दावा है कि कस्तूरबा वाटर वर्क्स और जेएमसी के वाटर ट्रीटमेंट की नियमित सफाई सुनिश्चित कराई जाती है। कस्तूरबा के पुराने प्लांट में शिल्ट जमने की रिपोर्ट के आधार पर सफाई कराई जाती है। जेएमसी द्वारा संचालित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भी बुडको द्वारा शील्ट जमने की स्थिति में सफाई सुनिश्चित कराई जाती है। शहर में पेयजलापूर्ति का पाइप कही भी सीबरेज के पाइप से अटैच नहीं है। जलापूर्ति के पाइप में रिसाव की शिकायत पर मरम्मत कराई जाती है। ---- उपभोक्ता परेशान इंदौर की घटना के बाद शहर के उपभोक्ता शहर में हो रहे शुद्ध पेयजलापूर्ति को लेकर परेशान हैं। शहर के लल्लू पोखर निवासी अधिवक्ता डीपी रॉय बताते हैं कि हालांकि उनके मुहल्ले में तो शुद्धपेयजल का सप्लाई ही नहीं है। बावजूद नगर निगम प्रशासन को सीबरेज और पेयजलापूर्ति के पाइप लाइन की जांच कर शुद्ध पेयजल शहरी क्षेत्र के घरों में आपूर्ति करनी चाहिए, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति हो। ---- बोली नगर आयुक्त शहरी क्षेत्र के 32 वार्ड के घरों में जेएमसी कम्पनी के द्वारा पानी को फिल्टर कर टीडीएस जांच के बाद ही शुद्ध पेयजल की सप्लाई की जाती है। जेएमसी के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और कस्तूरबा वाटर वर्क्स के पुराना प्लांट में शिल्ट जमने की स्थिति में नियमित सफाई कराई जाती है। हाल ही में पुराना प्लांट की सफाई कराई गई है। - शिवाक्षी दीक्षित, नगर आयुक्त, नगर निगम, मुंगेर --------------------------------------- तीन वर्षों से ना तो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ना ही चार मीनारों की हुई अबतक साफ सफाई व मेंटनेंस जमालपुर, निज प्रतिनिधि। इंदौर की घटना से पूरे देश के नगर निकायों को हिला कर रख दिया है। दूषित पेयजल से 13 की मौत का दावा के बाद सूबे के विभिन्न नगर निमग, नगर परिषद व नगर पंचायतों में पानी की शुद्धता जांच की प्रक्रिया के प्रति गंभीर होने लगे हैं। इधर, जमालपुर नगर परिषद क्षेत्र के करीब पांच वार्डों में जलापूर्ति योजना का पाइप क्षतिग्रस्त है। इसमें वार्ड नंबर 3 स्थित आशिकपुर, नप वार्ड नंबर 32 और 33 फरीदपुर, वार्ड नंबर 24 वलीपुर और वार्ड नंबर 20 वलीपुर में जलापूर्ति पाइप क्षतिग्रस्त है। क्षतिग्रस्त पाइप से नाली का दूषित पानी सीधे घर के नल तक पहुंच रहा है। लेकिन इसकी चिंता ना तो नगर परिषद जमालपुर प्रशासन को और ना ही पीएचडी विभाग ने कभी इसकी जांच पड़ताल की है। जबकि पीएचडी विभाग को हर सप्ताह पानी की जांच कर रिपोर्ट सौंपनी का दायित्व दिया गया है। गौरतलब है वर्ष 2024 के जुलाई और अगस्त माह में गंगा का डायरेक्ट पानी का सप्लाई दिया गया था। जिससे कई तरह की बीमारियों की चपेट में वार्डवासी आए थे। वैसे नप प्रशासन के हाथों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का मेंटनेंस और पानी सप्लाई का जिम्मेवारी जून 2024 को ही सौंपा गया था। 3 वर्षों से नहीं हुई अबतक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व जलमीनारों की सफाई व जांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की जांच एक सतत प्रक्रिया है जिसमें कई पैरामीटर्स (क्लोरीन, मैलापन, घुली हुई ऑक्सीजन) की जांच होती है, जो पानी के स्रोत से लेकर अंतिम वितरण तक की जाती है। इसमें प्रयोगशाला परीक्षण, ऑनलाइन निगरानी और नियमित सैंपल कलेक्शन शामिल हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पानी पीने योग्य और सुरक्षित है, जिसमें स्क्रीनिंग, फ्लोकुलेशन, सेडिमेंटेशन, फिल्ट्रेशन और कीटाणुशोधन (क्लोरीनीकरण) जैसे चरण शामिल होते हैं, और गुणवत्ता की पुष्टि के लिए नियमित रूप से प्रयोगशालाओं को सैंपल भेजे जाते हैं। इसकी जिम्मेदारी पीएचडी विभाग मुंगेर को दी गयी है। उनकी टीम को हर सप्ताह पानी का जांच कर रिपोर्ट देनी होती है। लेकिन जमालपुर में बीते तीन वार्षों से इसकी जांच नहीं की गयी। वहीं वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और चार जलमीनारों की भी साफ सफाई एक बार भी नहीं की गयी है। नतीजनत, गंदा पानी सेवन से कई वार्डों में कई तरह की बीमारियों से जुझना पड़ा रहा है। वार्डवासी सत्यम, शुभम, नीरज, पंकज, सौरव, दीपक, प्रदीप सहित अन्य बताते है कि दूषित पानी के नल से निकलने और पीने से डायरिया (दस्त), हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस बी, पोलियो और अमीबियासिस जैसी बीमारी हो रही है।