
अष्टाक्षरी महामंत्र बाबा नाम केवलम को अपने जीवन में आत्मसात करें मानव, समस्याएं होंगी दूर: पुरोध प्रमुख
जमालपुर में श्री प्रभात रंजन सरकार उर्फ श्रीश्री आनंदमूर्ति जी के 104वें जन्मोत्सव पर 35वें विश्व धर्म महासम्मेलन का उद्घाटन हुआ। इस सम्मेलन में लगभग 5000 आनंदमार्गी और विदेशी श्रद्धालु शामिल हुए।...
जमालपुर। निज प्रतिनिधि आध्यात्मिक संगठन आनंदमार्ग के प्रवर्तक व संस्थापक श्री प्रभात रंजन सरकार उर्फ श्रीश्री आनंदमूर्ति जी के 104वें जन्मोत्सव पर आनंदमार्ग प्रचारक संघ, केंद्रीय कमेटी की ओर से शुक्रवार को तीन दिवसीय 35वें विश्व स्तरीय धर्ममहासम्मेलन (डीएमएस) का शुभारंभ अमझर पहाड़ी की तराई अवस्थित आनंद सम्भूति मास्टर यूनिट परिसर में समारोहपूर्वक हुआ। प्रथम दिन सम्मेलन में देश व विदेश से करीब 5 हजार आनंदमार्गियों व उनके समर्थकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत संघ अध्यक्ष सह प्रमुख पुरोधा विश्वदेवानंद अवधूत के प्रवचन से हुआ। पुरोधा प्रमुख ने कीर्तन: भक्तों की पुकार विषय पर प्रकाश डाला। तथा कहा कि अष्टाक्षरी मंत्र बाबा नाम केवलम् को आज आत्मसात करने की जरूरत एक एक मानव को है।

इस मंत्र का जाप कर आवार्ता और अखंड कीर्तन करने से मानव के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। मंचासीन जेनरल सेक्रेटरी आचार्य अभिरामानन्द अवधूत, पर्सनल असिस्टेंट आचार्य अमलेशानन्द अवधूत, धर्म प्रचार सेक्रेटरी आचार्य मेघदीपानन्द अवधूत थे। इधर, आनंदमार्गियों ने विश्वशांति के लिए दुआएं मांगी। --------------------------------------------------------------- बाबा के आदर्श और विचार में मानव कल्याण से है पे्ररित: विदेशी सन्यासी जमालपुर। निज प्रतिनिधि आत्मा की मुक्ति के लिए आध्यात्मिक योग और साधना एवं जन कल्याण के लिए सभी सेवा मूलक कार्य करना ही आनंदमार्ग के अनुयायियों का कर्तव्य है। शुक्रवार को बाबा नगर में आयोजित 35वें धर्म महासम्मेलन में कई देशों से विदेशी, आनंदमार्गी, सन्यासी और समर्थन जमालपुर पहुंचे हैं। इसमें फ्रांस, साउथ अफ्रिका, ब्राजिल, यूक्रेन, चेकोस्लोवाकिया, फ्रांस, रसिया, यूरोप, इंडोनेशिय, कजाकिस्तान, गोरजिया, इंग्लैंड, इटली सहित 25 देशों से सैलानी बाबा के दरबार में हाजरी लगायी है। तथा बाबा की जन्म स्थली सहित अन्य एतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण किया है। वहीं विदेसियों को प्राऊत पुस्तक आदि सामग्री भी उपलब्ध करायी जा रही है। वहीं महाअष्टाक्षरी मंत्र बाबा नाम केवलम जाप में तल्लीन हो रहे है विदेशी सैलानी। विदेशी सैलानी ने बताया कि आनंदमार्ग मिशन अन्य धर्मो से अलग है। सेवा करने से मन पवित्र होता है। शिक्षा और सेवा तथा बाबा का आध्यात्मिक दर्शन पूरे विश्व में एक लौ की तरह जल रहा है। बाबा दुनिया के सैकड़ों भाषाओं के ज्ञानी थे। जबकि वे किसी डिक्शनरी को न देखा और न ही वहां गये, बावजूद इसके जो शिष्य आते थे वे उनके भाषा में ही बातें करने लगते थे। उन्होंने बाबा के आदर्श और विचार में मानव कल्याण से पे्ररित बताया। तथा कहा कि उनके स्मरण मात्र से ही कष्ट दूर हो जाते है। इधर, भारतीय पौशाक पहनकर विदेशी गदगद है।

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