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मुंगेरबड़े आम उत्पादक एवं व्यापारी लॉकडाउन से परेशान

हिन्दुस्तान टीम,मुंगेरPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 08:20 PM
बड़े आम उत्पादक एवं व्यापारी लॉकडाउन से परेशान

मुंगेर। एक संवाददाता

एक तरफ मुंगेर के लोग जहां कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ मुंगेर के बड़े आम उत्पादक किसान एवं व्यापारी भी कम परेशान नहीं हैं। स्थिति यह है कि, बढ़ते पेट्रोल की कीमत के कारण एक तरफ ट्रांसपोर्टिंग खर्च बढ़ गया है तो दूसरी तरफ लॉकडाउन के कारण बिहार के अन्य मंडियों में आम के मांग में कमी आई है। ट्रांसपोर्टिंग खर्च बढ़ने के कारण बिहार से बाहर आम की सप्लाई करना व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

अत: इसे देखते हुए व्यापारी दूसरे राज्यों को आम की सप्लाई इस बार नहीं कर रहे हैं। ज्ञात हो कि, मुंगेर के चुरंबा का दूधिया मालदह आम अपने स्वाद एवं रसीले गूदे के कारण समूचे देश में प्रसिद्ध है। यहां से समूचे बिहार के अलावे दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में इस आम की सप्लाई की जाती है। इसके अतिरिक्त मुंगेर के आम की मांग नेपाल में भी काफी है और व्यापारी वहां तक आम की सप्लाई करते हैं।

क्या कहते हैं आम उत्पादक एवं व्यापारी:

मुंगेर के चुरंबा से दूधिया मालदह का बिहार के अन्य मंडियों के साथ-साथ अन्य राज्यों एवं नेपाल तक सप्लाई करने वाले सबसे बड़े व्यापारी मो हाजी रब्बानी ने लॉकडाउन का आम के व्यापार पर पड़े असर के संबंध में बताते हुए कहा कि, बढ़ते पेट्रोल की कीमत के कारण ट्रांसपोर्टिंग खर्च में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि आई है। जबकि, लॉकडाउन के कारण मुंगेर से बाहर अन्य जगहों के मंडी में लगभग 20 प्रतिशत मांग में कमी आई है। बाहर के मंडियों में आम की समुचित कीमत भी नहीं मिल रही है। ऐसे में आम का व्यापार एक घाटे का व्यापार बनकर रह गया है। अभी बिहार के अन्य मंडियों में, जहां कुछ कीमत मिल रही है, वहीं मुंगेर से आम को भेजा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि, वास्तविक स्थिति यह है कि, लागत एवं आम के विक्रय मूल्य में ना के बराबर अंतर है। वास्तव में आम का व्यापार वर्तमान परिस्थिति में लाभदायक व्यापार नहीं रह गया है। श्री रब्बानी की बातों का समर्थन दूरभाष पर मुंगेर के अन्य प्रमुख व्यापारियों एवं किसानों ने भी किया। मो मुनव्वर, मो आलम, मो मुफीद आदि प्रमुख व्यापारियों ने श्री रब्बानी का समर्थन करते हुए कहा कि, हम लोगों ने आम के उत्पादन में अपनी पूंजी लगाया है। इसका व्यापार करना अब हमारी मजबूरी है, ताकि कम- से- कम पूंजी वापस आ सके।

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