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25 जनवरी, 2020|2:43|IST

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जिले में 57 पैथोलॉजी ही वैध , भ्रम की स्थिति

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सिविल सर्जन मुंगेर द्वारा जिले में कुल 57 वैध पैथोलॉजी की सूची जारी की गयी है। बावजूद अब भी जिले भर में दर्जनों अवैध पैथोलॉजी संचालित हो रही हैं। इतना ही नहीं जितने भी पैथोलॉजी के नाम जारी किये गये हैं, उनमें से एक का भी पता सार्वजनिक नहीं किया गया है। जिसके कारण लोगों के बीच इस सूची को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है और इस पर सवाल उठने लगे हैं।

सूची प्रकाशन के नाम पर खानापूर्ति: सिवल सर्जन मुंगेर द्वारा जिन 57 पैथोलॉजी की सूची सार्वजनिक की गयी, उसे लोग महज खानापूर्ति बता रहे हैं। क्योंकि जारी किये गये सूची में से अधिकांश पैथोलॉजी मानकों को पूरा भी नहीं कर रहा है। जबकि कई पैथोलॉजी का नाम दो-दो बार लिया गया है। इतना ही नहीं जिन पैथोलॉजी की सूची को जारी की गयी है, उनमें से एक का भी पता सर्वाजनिक नहीं किया गया है। जिससे कोई यह दावा नहीं कर सकता कि वास्तव में उक्त नाम की कौन से पैथोलॉजी वैध है। जानकारों का मानना है कि पैथोलॉजी की सूची प्रकाश करने में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गयी है, शायद इसी कारण से गोल-मटोल तरीके से सूची का प्रकाश किया गया है। जबकि बांकी जिले द्वारा प्रकाशित की गयी पैथोलॉजी की सूची पूरा पता के साथ प्रकाशित किया गया है।

अब भी संचालित हो रहीं दर्जनों अवैध पैथोलॉजी: सिविल सर्जन द्वारा जारी किये गये सूची को लोग इस कारण से भी खानापूर्ति मान रहे हैं कि सूची प्रकाशन के बावजूद जिले भर में अब भी दर्जनों अवैध पैथोलॉजी संचालित हो रही हैं। जहां मानकों का जरा भी पालन नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण अब भी लोग अवैध पैथोलॉजी का शिकार हो रहे हैं। हाल यह है कि सही जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाने के कारण मरीजों के बीमारी का न तो सही से पता चल पाता है और न ही उसका समय पर उचित इलाज हो पा रहा है।

आनन-फानन में जारी हुई सूची

हाइकोर्ट की फटकार के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में वैध पैथोलॉजी की सूची जनता की जानकारी के लिए सार्वजनिक की है। मरीजों को नसीहत दी गयी है कि वे अपने जिले के वैध व मानकों पर चलने वाले जांच घरों में ही अपनी जांच करावें। पटना हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को दिये गये आदेश में कहा है कि राज्य के सभी ऐसे जांच घर, पैथोलॉजी, लैबोरेटरी व डायग्नोस्टिक सेंटर को नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जीवन को हानि पहुंचाने के लिए संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे सभी पैथोलॉजी लैबोरेटरी, जांच घर जो अवैध रूप से संचालित किये जा रहे हैं उनको बंद करना है।

पैथोलॉजी के लिए क्या है मानक:

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पैथोलॉजी रिपोर्ट में हस्ताक्षर करने के लिए एमडी पैथोलॉजिस्ट का लैब में रहना जरूरी है। डिजिटल साइन वाला पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट मान्य नहीं है। लैब टेक्नीशियन जांच रिपोर्ट पर साइन नहीं कर सकेंगे। क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट के तहत जहां 30 तक सैंपल लिए जाते हैं, वहां किसी पंजीकृत संस्था से एमबीबीएस डाक्टर होना चाहिए और एक वर्ष का अनुभव लैब कार्यों में होना चाहिए। जबकि 30 से 100 सैंपल और 100 सैंपल से अधिक वाली लैबों में इंचार्ज एमडी/डीएनबी होना चाहिए। एमडी/डीएनबी पैथोलॉजी, लैब मेडिसिन, क्लीनिकल पैथोलॉजी में एक वर्ष का डिप्लोमा होना चाहिए। किसी प्रकार की विशेष जांच के लिए विशेषज्ञ का होना जरूरी है। विशेषज्ञ अस्पताल का कर्मचारी हो या फिर पार्ट टाइम में कार्य देखता हो या आउटसोर्स से रखा गया हो।

जारी की गयी 57 वैध पैथोलॉजी की सूची

डॉ एस सोहैल जांच घर, माया पैथोलॉजी, मुंगेर पैथोलॉजी, गुप्ता पैथोलॉजी, चित्रा पैथोलॉजी, लाइफ केयर पैथोलॉजी, रिलिफ पैथोलॉजी, सावित्रि पैथोलॉजी, संजीवनी पैथोलॉजी, डॉ डायग्नोस्टिक सेंटर, लाला पैथोलॉजी, तिवारी पैथोलॉजी, पूजा पैथोलॉजी, पवन पैथोलॉजी, ओम पैथोलॉजी, शांति पैथोलॉजी, गेटवेल पैथोलॉजी, आस्था पैथोलॉजी, ब्लू अपोलो पैथोलॉजी, कुमार पैथोलॉजी, हेल्थ केयर पैथोलॉजी, शिवम पैथोलॉजी, अनु पैथोलॉजी, नेशनल पैथोलॉजी, परख पैथोलॉजी, सोमी पैथोलॉजी, शिव पैथोलॉजी, सिटी पैथोलॉजी, डोयल पैथोलॉजी, भारत पैथोलॉजी, गीतांजलि पैथो लैब, कोमल पैथो लैब, निदान पैथोलॉजी, ट्रापिकल पैथोलॉजी, हाईटेक डायग्नोस्टिक, सावित्रि पैथोलॉजी, पब्लिक हेल्थ पैथोलॉजी, अपोलो पैथो लैब, राहत जांच घर, मॉर्डन पैथोलॉजी, दिलशान पैथोलॉजी, नेशनल पैथोलॉजी, कंचन पैथोलॉजी, रामावतार पैथोलॉजी, कंचन पैथोलॉजी, सहयोग पैथोलॉजी, श्यामा पैथोलॉजी, तारापुर पैथोलॉजी, शुक्ला पैथोलॉजी, मार्डन पैथोलॉजी, हरिओम पैथोलॉजी, एडभांस पैथोलॉजी, पाल पैथोलॉजी, भरत जांच घर, महर्षि जांच घर, प्रसून जांच घर तथा राहत पैथोलॉजी।

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  • Web Title:57 pathology valid in the district confusion