गंडक संधि पर नेपाल में बवाल, सांसदों ने सालभर पानी को लेकर पीएम बालेन साह को घेरा

Jayendra Pandey लाइव हिन्दुस्तान, बगहा
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नेपाल के नवलपरासी के सांसदों ने 1959 की गंडक नदी संधि को असमान करार देते हुए पीएम बालेन साह से समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि नेपाल की नहरों में साल भर पानी न रहने से तराई के किसान संकट में हैं। उन्होंने संधि की शर्तों में सुधार कर जल संसाधनों का…

गंडक संधि पर नेपाल में बवाल, सांसदों ने सालभर पानी को लेकर पीएम बालेन साह को घेरा

Bihar News: भारत और नेपाल के बीच दशकों पहले हुई ऐतिहासिक 'गंडक नदी संधि' अब विवादों के घेरे में है। नेपाल के नवलपरासी जिले के दो वरिष्ठ सांसदों, विक्रम खनाल और विक्रम कुमार गुप्ता ने इस दशकों पुरानी संधि को नेपाल के हितों के खिलाफ बताते हुए प्रधानमंत्री बालेन साह से इसकी समीक्षा करने की मांग की है। सांसदों का सीधा आरोप है कि मौजूदा शर्तों के कारण नेपाल को अपने हक का पानी नहीं मिल रहा है।

किसानों के साथ हो रहा है अन्याय

सांसद विक्रम खनाल ने जोर देते हुए कहा कि गंडक नहर में सालोंभर पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण नवलपरासी सहित पूरे तराई क्षेत्र की खेती बर्बाद हो रही है। सांसदों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में 1959 में हुआ यह समझौता अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। उन्होंने पीएम बालेन साह से अपील की है कि भारत सरकार के साथ इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाए और संधि में जरूरी संशोधन कर नेपाल के किसानों के लिए पानी की व्यवस्था की जाए।

तकनीकी बंटवारा और प्रशासनिक पेच

गौरतलब है कि यह संधि 4 दिसंबर 1959 को हुई थी। गंडक बराज के कुल 52 फाटकों में से 18-18 फाटक भारत और नेपाल के भौगोलिक क्षेत्रों में आते हैं। मुख्य पश्चिमी नहर (नेपाल) और पूर्वी नहर में 8-8 फाटक हैं। नेपाली सांसदों का दावा है कि तकनीकी और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण नेपाल को आवंटित सिंचाई लक्ष्य कभी पूरे नहीं हो सके। स्थानीय किसान संगठनों ने भी इस मांग का पुरजोर समर्थन किया है, जिससे नेपाल में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

भारत निभा रहा है सुरक्षा की जिम्मेदारी

दूसरी ओर, इतिहास के जानकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि संधि के तहत भारत आज भी नेपाल क्षेत्र में गंडक के दाएं तटबंध, ए-गैप और बी-गैप की नियमित देखभाल कर रहा है। मानसून से पहले भारत द्वारा किए जाने वाले कटावरोधी कार्य ही नेपाल के बड़े हिस्से को बाढ़ से बचाते हैं। वाल्मीकि नगर सांसद सुनील कुमार ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीमा और जल विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों को आपस में बैठकर समाधान निकालना चाहिए।

बगहा से चन्द्रभूषण शांडिल्य की रिपोर्ट

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लेखक के बारे में

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अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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