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नहीं बना पुल, चचरी पुल ही मतदान में आया काम

नहीं बना पुल, चचरी पुल ही मतदान में आया काम

संक्षेप:

मोतिहारी के सुंदरपुर गांव के मतदाताओं ने बूढ़ी गंडक नदी पार करने के लिए बांस के चचरी पुल का इस्तेमाल किया। पुल नहीं होने के कारण मतदाता नावों का सहारा लेते थे, लेकिन इस बार सुरक्षा कारणों से चचरी पुल का निर्माण किया गया। ग्रामीणों ने सहयोग से मतदान केंद्र तक पहुंचने का रास्ता निकाला।

Nov 15, 2025 11:42 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मोतिहारी
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मोतिहारी। हिन्दुस्तान संवाददाता। बूढ़ी गंडक नदी को पार कर मतदान करने बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केन्द्र तक मंगलवार को पहुंचे। न नाव की व्यवस्था थी और न तो कोई पुल का निर्माण हुआ है। पुल के इंतजार में साल दर साल बीतते गये, लेकिन पुल का निर्माण नहीं हो सका। आखिरकार बूढ़ी गंडक नदी पर बांस से बना चचरी पुल ही मतदाताओं के काम आया । महिला व पुरुष मतदाताओं ने कई किलोमीटर की दूरी तय कर मतदान करने पहुंचे। इस चचरी पुल का उपयोग पहली बार मतदान के लिए ही किया गया। यह हाल है नरकटिया विधानसभा क्षेत्र के बंजरिया प्रखंड के सुंदरपुर गांव का।

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नदी से दो भागों में बंटे सुंदरपुर गांव के मतदाता एक ही जगह गांव स्थित सरकारी विद्यालय में बने बूथ पर मतदान करते हैं। सुंदरपुर गांव के दक्षिण तरफ के सुंदरपुर टोले के मतदाताओं को बूढ़ी गंडक नदी के इस पार आने के लिए कोई पुल नहीं है। पहले की चुनावों में मतदाता नाव से पार कर मतदान करने आते रहे हैं। लेकिन कई बार नाव दुर्घटना होने के कारण इसबार के चुनाव में बांस की चचरी पुल बनाकर मतदान करने की तैयारी की थी जिसे लोगों ने कर भी दिखाया। बूढ़ी गंडक नदी पर पुल नहीं बनने से मतदाताओं को काफी मलाल है। इस बाबत मतदाता सफी अहमद अंसारी,सलीमा अंसारी,योगेन्द्र राम,दशरथ राम,जीउत सहनी,अमरीका साह,नसीमा खातून,प्रभा देवी ,सरस्वती देवी आदि मतदाताओं ने बताया कि नदी पार कर मतदान करने जाना असंभव लग रहा था। लेकिन ग्रामीणों ने जनसहयोग से चचरी पुल का निर्माण कराया जिससे वे लोग नदी पार कर मतदान केन्द्र तक पहुंचकर मतदान कर सके हैं। यहां से गांव की दूरी भी अधिक होने से आने जाने में काफी परेशानी होती है। बताया कि यहां बूढ़ी गंडक नदी पर पुल बन जाता तो मतदाता किसी न किसी सवारी से आकर सुविधाजनक तरीके से मतदान कर पाते। लेकिन आज तक पुल का निमार्ण नहीं हो सका। मतदाताओं ने बताया कि कई बुर्जुग मतदाता पुल नहीं होने से मतदान से वंचित रह जाते हैं। क्योंकि नदी पार कर मतदान करने आना बुजुर्गों के लिए संभव नहीं है। इसके बावजूद इस समस्या पर किसी का भी ध्यान नहीं है।