प्रभावित परसौना, शंकर सरैया व बालगंगा में लगा कैंप
तुरकौलिया के परसौना गांव में शराब कांड के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कैंप शुरू किया है। हालांकि, लापरवाही और देरी के कारण कई जानें गई हैं। योद्धा मांझी की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया, लेकिन समय पर उपचार न मिलने से उनकी मृत्यु हो गई। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं।

तुरकौलिया। थाना क्षेत्र स्थित परसौना गांव में शराब कांड के बाद स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय है और प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप के माध्यम से लोगों की जान बचाने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद लापरवाही और देरी के कारण जानें जा रही है। मेडिकल कैंप में तैनात चिकित्सकों ने बताया कि योद्धा मांझी उर्फ जोधा मांझी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए थे। उनकी स्थिति बिगड़ने पर मेडिकल टीम ने उन्हें चिन्हित कर तत्काल अस्पताल भेजा था। हालांकि, शनिवार की शाम को वह अस्पताल से भागकर वापस अपने घर लौट आए थे।जिससे उनकी हालत और गंभीर हो गई।
रविवार को जब फिर से उनकी तबीयत बिगड़ी, तो मेडिकल कैंप के चिकित्सक डॉ पंकज कुमार और डॉ सी.बी. कुमार ने तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था कर उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया। वहां इलाज शुरू किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद योद्धा मांझी की जान नहीं बचाई जा सकी। डॉ पंकज कुमार ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि लोग शराब पीने वालों को छुपाने के बजाय समय रहते जानकारी देते, तो इतनी बड़ी संख्या में मौतें नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में लोग तब सामने आते हैं, जब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जहरीली शराब के सेवन के बाद लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज बेहद जरूरी होता है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और डर के कारण लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। यहीं कारण है कि कई मामलों में स्थिति गंभीर हो जाती है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सीएचसी तुरकौलिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्जुन कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रभावित बस्ती में 24 घंटे मेडिकल कैंप संचालित किया जा रहा है। वहां डॉक्टरों की टीम लगातार लोगों की जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को तत्काल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं। लेकिन लगातार हो रही मौतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जागरूकता और समय पर इलाज ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है।
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