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हिंदी न्यूज़ बिहार मोतिहारीकश्मीर कमाने गए मजदूरों की अटकी है सांसें

कश्मीर कमाने गए मजदूरों की अटकी है सांसें

हिन्दुस्तान टीम,मोतिहारीNewswrap
Tue, 19 Oct 2021 11:20 PM
कश्मीर कमाने गए मजदूरों की अटकी है सांसें

सुगौली | निज संवाददाता

कश्मीर में बने भय व दहशत के साये में प्रखण्ड के करीब एक हजार मजदूर फंसे हैं। वे अपनी गाढ़ी कमाई से खड़ा किये धंधा पानी अब हमेशा के लिए छोड़ने का मन बना निकलने की जुगत ढूंढ रहे हैं।

खुद की रेहड़ी के सामने हुयी हत्या के बाद श्रीपुर के रंजीत प्रसाद ने हिन्दुस्तान को फोन पर बताया कि उनके ठीक सामने वाली पानी पूड़ी की रेहड़ी वाले को गोली मारने के बाद मेरे दायेें तरफ करीब बीस फीट की दूरी पर लगे दूसरे रेहड़ी वाले को आतंकवादियों ने गोली मार दी। कई वर्षों से हम सभी साल के सात से आठ महीने यही रहकर काम करते आये है।मोबाइल का इस्तेमाल भी अब करने से हमें अपनी पहचान होने का डर सता रहा है। श्रीपुर के ही रामबली महतो महतो ने बताया कि बड़ी मुश्किल से अपना सबकुछ यही छोड़ ट्रक से निकल कर राहत का सांस ले रहे हैं। इनलोगों पर भी भय कुछ इस तरह हावी था कि जबतक घाटी से बनिहाल नहीं आ गए तबतक किसी का फोन भी रिसीव नहीं किया। ट्रक से बनिहाल उतरने के बाद ये सभी नौ लोगों ने एक ही इनोवा गाड़ी में सवार होकर कटरा पहुंचे हैं। इन नौ लोगों में नगर के बहुरूपिया के धीरज पटेल, हरसिद्धि के घिउआढ़ार के लालबहादुर महतो, लौकरिया के सोनू सहित उत्तरी श्रीपुर के बनारसी महतो,चंदन कुमार,संतोष साह, अमीरका महतो आदि शामिल हंै। इनलोगों ने भी दूरभाष पर बताया कि कश्मीर से निकलने के लिए बस बन्द है। कदम कदम पर सेना के जवान भरे पड़े हैं। फिर भी किसी को अपने कमरे से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। हमलोग एक ही साथ कश्मीर के लाल चौक के समीप रहते थे। जहां से बड़ी हिम्मत के बाद मंगलवार के दिन में बिना कुछ लिए खाली हाथ निकले हैं। जहां से हमे बनिहाल जा रही एक ट्रक मिला। इकट्ठे पांच हजार रुपये भाड़ा देना पड़ा। वहां से फिर सात हजार रुपये में कटरा पहुंचाने के लिए इनोवा गाड़ी भाड़ा कर पहुंचे है। बुधवार की सुबह कटरा कामाख्या ट्रेन से हमलोग घर आ रहे हैं।

दहशत के साए में याद आ रहा था गांव:पीपराकोठी। प्रकृति में जन्नत की नूर कहे जाने वाले कश्मीर में मजदूरी व खूबसूरत जीवन के का ख्वाब सजा कर आए लोग आज दहशतगर्दों के कारण दहशत के साए में गांव लौट रहे हैं। ढाका के मुश्ताक ने बताया कि बीते कुछ दिनों से बाहरी लोगों पर हमले बढ़ गए हैं। आतंकी यहां खासतौर से गैर-कश्मीरी मजदूरों को निशाना बना रहे हैं। उन्हें यहां पर रहना सुरक्षित नहीं लग रहा है। कई प्रवासी मजदूर दीवाली पर घर जाने वाले थे, लेकिन त्योहार से पहले ही यहां से निकल रहे हैं।

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