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मोतिहारीअल्ट्रासाउंड का फार्म एफ की रिपोर्ट का नहीं होता है वेरिफिकेशन

हिन्दुस्तान टीम,मोतिहारीPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:20 AM
अल्ट्रासाउंड का फार्म एफ की रिपोर्ट का नहीं होता है वेरिफिकेशन

मोतिहारी। नगर संवाददाता

जिले में संचालित अल्ट्रासाउंड के संचालकों के द्वारा दिये गए फार्म एफ के रिपोर्ट की जांच नहीं होती है। बस फार्म एफ एक फारमलिटी बन कर रह गया है।

बताते हैं कि अल्ट्रासाउंड संचालक को सरकारी गाइडलाइन के अनुसार लाइसेंस निर्गत किया जाता है। फार्म एफ पर हर महीने रिपोर्ट देना है कि कितने का अल्ट्रासाउंड हुआ। किस डाक्टर का पूर्जा था, किस पार्ट का अल्ट्रासाउंड किया गया ,मरीज की उम्र क्या थी, कितने महिला व कितने पुरुष का अल्ट्रा साउंड किया गया इन सब की जानकारी देनी है। मरीज के क्लीनिक में बैठने की सुविधा से लेकर शुद्ध पेय जल की व्यवस्था की भी जानकारी फार्म एफ में देनी है। वहीं दिये गये रिपोर्ट के सत्यता की भी जांच करनी है। मगर यहां ऐसा नहीं होता है।

जानकर बताते हंै कि अधिकांश अल्ट्रासाउंड संचालक के पास साफ सफाई के साथ मरीजों के बैठने की अच्छी सुविधा नहीं है। वाशरूम इतना गन्दा है कि उसके बदबू से बचने के लिए मरीज इधर उधर बैठ कर बुलावे का इंतजार करते हैं। जबकि अल्ट्रासाउंड संचालक के क्लीनिक पर वाशरूम पूरी तरह साफ होना चाहिए। मगर इसे कोई भी नहीं देख रहा। जांच भी मात्र औपचारिकता बन कर रह जाती है ।

जानकर बताते हैं कि कई अल्ट्रासाउंड संचालक डाक्टर के नाम पर लाइसेंस तो ले लिया है मगर अल्ट्रासाउंड करते समय न तो डाक्टर होते हंै व न उनके पास जानकार टेक्नीशियन तक है। डॉक्टर के यहां काम किये बगैर कई डिग्री धारक अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। जिसके चलते डॉक्टरों को इलाज में परेशानी हो रही है। इसकी शिकायत कई डॉक्टरों ने सिविल सर्जन से भी की है।

कहते हैं सिविल सर्जन:

सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश्वर प्रसाद सिंह के अनुसार, इसकी जांच होगी। जिस स्तर से गड़बड़ी होती है उस पर कार्रवाई होगी।

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