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28 अक्तूबर, 2020|11:17|IST

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शिक्षकों एवं बुद्धजीवियों को अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता

शिक्षकों एवं बुद्धजीवियों को अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता

महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के चाणक्य परिसर में राष्ट्रीय चेतना से अनुप्राणित प्राध्यापकों का समूह मंथन भारती, मोतिहारी (बिहार) के तत्वावधान में ‘भारत के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बुद्धजीवियों की भूमिका विषयक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। परिसंवाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विशेषज्ञ वक्ता अखिल विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्रीनिवास थे। विषय प्रवर्तन एवं स्वागत मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष अधिष्ठाता प्रो. अरुण कुमार भगत ने किया। बतौर मुख्य वक्ता श्रीनिवास ने कहा कि भारत का गौरवशाली अतीत रहा है। विश्व को भारत ने शून्य से लेकर योग, अध्यात्म, वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति से लेकर मानव जीवन के विविध जीवन दर्शन से अनुप्राणित किया है। इसमें बुद्धिजीवियों व शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान परिवेश में देखा जाये तो राष्ट्रीय विचारों के संवाहक के रूप में शिक्षकों एवं बुद्धजीवियों को अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। भारत देश में सबको साथ लेकर चलने की पुरातन परम्परा रही है, चाहे वह किसी भी धर्म, सम्प्रदाय और विचारधारा से जुड़ा क्यों न हो। लेकिन सबको साथ में लेकर चलने के साथ हमें राष्ट्रीय सोच और विचारों को भी सम्मान देने और प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए। यह दुखद पहलू है कि भारत की राष्ट्रीय अखण्डता और एकता को चोट पहुंचाने का कुछ लोग कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। मुख्य वक्ता श्रीनिवास जी का अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत प्रो. अरुण कुमार भगत और डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शोध एवं विकास संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजीव कुमार, शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आशीष श्रीवास्तव, वित्त अधिकारी प्रो. विकाश पारिख, प्रो. प्रसून दत्त सिंह, अखिल विद्यार्थी परिषद के बिहार प्रदेश की मंत्री सुश्री लक्ष्मी, विजय जी, डॉ. श्याम कुमार झा, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. बिमलेश कुमार सिंह, डॉ. साकेत रमण, डॉ. सुनील दीपक घोडके, डॉ. श्याम नंदन, डॉ. विश्वेश जी, डॉ. बबलू पाल सहित विभिन्न विभाग के शिक्षक एवं शोधार्थी थे।

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  • Web Title:Teachers and intellectuals need to play a leading role