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एसआईटी ने खंगालीं कई फाइलें

एसआईटी ने 30 करोड़ से भी अधिक के धान हड़पने वाले मिलरों व इसके लिए दोषी पदाधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एसआईटी के सदस्यों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंच कर नीलाम पत्र कार्यालय, आपूर्ति विभाग व अपर समाहर्ता के कार्यालय में जाकर मिलरों से जुड़े फाइलों को खंगाला। टीम में सब इंस्पेक्टर राजन कुमार व शशिभूषण कुमार शामिल थे। फाइलों की जांच के दौरान इन पदाधिकारियों ने कई ऐसे कागजात को संग्रहित भी किया, जो मामले की तह तक पहुंचने में उनके लिए काफी कारगर साबित हो सकते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक करोड़ों के इस गबन मामले में कई पदाधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। एसआईटी उन पदाधिकारियों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने जिला आपूर्ति पदाधिकारी व जिला प्रबंधक बिहार राज्य खाद्य निगम के निर्देश पर अनाज आवंटित करने से पहले मिलरों की राइस मिल तथा उनके गोदाम का भौतिक सत्यापन किया था। इधर एसआईटी द्वारा गबन की जांच शुरू होते ही मिलरों के बीच हड़कम्प मच गया है। इधर, कई पदाधिकारियों की भी परेशानी बढ़ गयी है। जांच में हैरान कर देने वाली बातें आयी हैं सामने: एसआईटी की जांच में कई ऐसी बातें सामने आयी हैं, जो बेहद हैरान कर देने वाली हंै। जांच के दौरान एसआईटी को कई ऐसे मिलर मिले हैं, जिनके पास राइस मिल तो है, लेकिन उनके पास अनाज रखने का गोदाम ही नहीं है। कई के पास गोदाम है तो वहां तक ट्रक के आने-जाने का रास्ता ही नहीं है। जबकि आनाज आवंटित करने से पहले इन सब चीजों के सत्यापन के लिए पदाधिकारी नियुक्ति किये गये थे। उनके सत्यापन के बाद ही मिलरों को अनाज दिया गया था। जांच में एक-आध ऐसे मामले भी मिले हैं कि बिना मिल के ही मिलर बन कर अनाज की हजारों बोरियों का उठाव कर लिया गया है। ऐसे में सत्यापन करने वाले पदाधिकारियों की भूमिका पूरी तरह संदेह के घेरे में आ गयी है। गबन में अब इनकी संलिप्तता की भी जांच हो रही है। क्या है मामला: वर्ष 2011-12 व 2012-13 में एसएफसी के जिला प्रबंधक ने एक एग्रीमेंट के तहत धान की कुटाई कर चावल देने के लिए जिले के 61 मिलरों को करोड़ों रुपये मूल्य का धान दिया था। सरकार की योजना के तहत धान के बदले मिलने वाला चावल जनवितरण प्रणाली के माध्यम से गरीब परिवारों के बीच बांटा जाना था। लेकिन, धान का उठाव करने के बाद मिलर उस पर कंुडली मार कर बैठ गये। उन्होंने सरकार को धान के बदले चावल लौटाया ही नहीं।

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