कला की कोख पर उपेक्षा का पहरा सिसक रहा है शहर का नगर भवन

Mar 01, 2026 04:56 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मोतिहारी
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राजेन्द्र नगर भवन शहर के कलाकारों के लिए एक धरोहर था, लेकिन कुव्यवस्था के कारण यह उपेक्षित हो गया है। कार्यक्रम के लिए ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था पुरानी है, बाथरूम में साफ-सफाई नहीं है और कुर्सियां टूटी हुई हैं।  

कला की कोख पर उपेक्षा का पहरा सिसक रहा है शहर का नगर भवन

शहर के कलाकरों के लिये कभी राजेन्द्र नगर भवन धरोहर था लेकिन उसकी कुव्यवस्था ने सबको पंगु बना दिया है। वह सिर्फ उपेक्षित इमारत बनकर रहा गया है। नगर भवन में कार्यक्रम करने में परेशानी होती है। साउंड सिस्टम व मंच आधुनिक नहीं है। सभी गुजरे जमाने के हैं। ध्वनि व प्रकाश की व्यवस्था सुसज्जित नहीं है। कार्यक्रम के दौरान आवाज गूंजने लगता है। दर्शकों के कानों तक ध्वनि का मानक रुप नहीं पहुंच कर विकृत रुप पहुंचता है। दर्शक भी उसमें बैठना नहीं चाहते। प्रसाद रत्नेश्वर का कहना है कि नगर भवन के बाथरुम के दीवारों पर पान व गुटखा फेंके रहते हैं।

साफ सफाई नहीं की जाती। फर्स टूटे हुए है। बदबू आती है। कार्यक्रम के दौरान कोई कलाकार या दर्शक उसमें जाने से परहेज करते हैं। इस स्थिति में परेशानी होती है। अनिल वर्मा का कहना है कि पहले नगर भवन के मंच पर तीन पर्दा लगे होते थे। कार्यक्रम के दौरान बारी बारी से पर्दा हटाकर कला की छटा विखेरी जाती थी। अब एक भी पर्दा ठीक हालत में नहीं है। आधे से अधिक कुर्सियां टूट चुकी है। वहां नयी कुर्सी की व्यवस्था नहीं की जाती है। इससे दर्शकों की संख्या भी कम हो जाती है। डॉ चन्द्र सुभाष का कहना है कि गर्मी के दिनों में नगर भवन में कार्यक्रम के दौरान परेशानी होती है। पंखा भी ठीक से काम नहीं करता है। उस हॉल में एसी लगाना आवश्यक है। नगर निगम इस बिन्दु पर ध्यान नहीं देती है। डॉ पुष्कर कुमार का कहना है कि ध्वनि की व्यवस्था पुराने जमाने की है। हॉल के अंदर में कार्यक्रम के दौरान आवाज गुंजने लगता है। ठीक से सुनाई नहीं देती है। वहां आधुनिक तरीके का ध्वनि सिस्टम विकसित करने की जरुरत है। डॉ अमरेश महर्षि का कहना है कि नगर भवन में कार्यक्रम करने से लोग कतराते हैं। गंदगी और जुआरियों का अड्डा बना हुआ है। इसे बंद करवाना चाहिए। नगर भवन का उपयोग शहर के लोगों के लिए होना चाहिए। साफ सफाई व सुरक्षा की व्यवस्था हो। डॉ एस प्रसाद का कहना है कि नगर निगम ने भवन आवंटन का दर बढ़ा दिया है। इसमें सुविधा नहीं दी गयी है। कोई चहारदीवारी नहीं है। बेरोकटोक उसके परिसर में अपने वाहन लेकर लोग भ्रमण करते हैं। कार्यक्रम के दौरान वाहन चोरी की घटनाएं होती है। मनोज कुमार सिन्हा का कहना है कि आज के दौर में नगर भवन ट्रेन का स्टीम इंजन बनकर रह गया है। जमाना बिजली व सोलर पर चला गया और नगर भवन पुराने दौर से गुजर रहा है। इसका अब पुनर्निर्माण करने की जरुरत है। डॉ मनोज कुमार का कहना है कि भवन आवंटन में सहजता नहीं होने से शहर के कलाकारों को यह भवन नहीं मिल पाता है। कलाकारों को कोई उचित प्लेटफार्म नहीं मिलने से वे अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं कर पाते। कलाकारों के लिये यह मुफ्त में आवंटन होना चाहिए। प्रभु गुप्ता का कहना है कि नगर भवन की कुव्यवस्था के कारण कोई भी व्यवसायी संगठन की ओर से उसमें कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाता है। व्यवस्था ठीक नहीं रहने से व्यवसायी निजी भवनों में अपना कार्यक्रम करते हैं। सुधीर कुमार का कहना है कि सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब इसे कार्यक्रम के लिये बुक किया गया और उस तिथि को कोई सरकारी कार्यक्रम की जरुरत पड़ गयी तो निजी बुकिंग को रद्द कर दिया जाता है। गणेश दत झा का कहना है कि कलाकारों के रिहर्सल के लिये नगर भवन उपलब्ध नहीं रहता है।

- प्रस्तुति : राकेश रंजन, धनंजय कुमार

बोले जिम्मेदार

राजेन्द्र नगर भवन के मरम्मत को लेकर बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया है। तीन माह के अंदर नगर भवन का जीर्णोद्वार किया जायेगा। वहीं उसके परिसर की चहारदीवारी कार्य को भी पूरा किया जायेगा। नगर भवन शहर के लोगों का धरोहर है। इसको सुरक्षित व सुन्दर बनाने का कार्य नगर निगम करेगा। परिसर की साफ-सफाई भी नियमित रुप से कराया जायेगा। परिसर में अवैध ढंग से पार्किंग करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जायेगी।

- आशीष कुमार, नगर आयुक्त, नगर निगम मोतिहारी

सुझाव

1. नगर भवन की साफ-सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। टूटी कुर्सियों व टूटते हुए छत की मरम्मत होना चाहिए।

2. मंच पर साउंड सिस्टम व प्रकाश की आधुनिक व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे कार्यक्रम में लोगों को ठीक से आवाज मिल सके।

3.बाथरुम सबसे बड़ी समस्या है। बाहर में एक शौचालय है उसकी मरम्मत हो। अंदर के शौचालय की सफाई ठीक से हो।

4. नगर भवन की चहारदीवारी करना जरुरी है। आवारा पशुओं का उसमें रोक लगेगा। जहां तहां गंदगी नहीं फैलायेगी।

5. जुआरी और गजेरियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई होनी चाहिए। परिसर में नशे की हालत में घुमने पर रोक लगेगी।

शिकायतें

1. नगर भवन की साफ-सफाई नहीं की जाती है। कुर्सियां टूटी हुई है और ऊपर से छत का कुछ हिस्सा टूटकर गिरने से डर होता है।

2. साउंड सिस्टम व मंच की व्यवस्था बहुत खराब है। पुराने ढर्रा पर ही चल रहा है। कार्यक्रम में ध्वनि का विकृत रुप मिलता है।

3. बाथरूम के दीवारों पर पान व गुटखा की गंदगी फेकी रहती है। फर्स जहां तहां टूट चुके हैं। पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है।

4. चहारदीवारी नहीं की गयी है। आवारा पशु खुलेआम विचरण करते हैं। निजी लोग अपना पार्किंग भी परिसर में बना दिया है।

5.जुआरी और गजेरियों का अड्डा बना हुआ है। शाम व सुबह में सभी धुमते हैं। कार्यक्रम में भी उनका कभी व्यवधान होता है।

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