Motihari News: रेबीज इंजेक्शन की कमी से अस्पताल में कुत्ता काटे मरीजों का इलाज ठप
Motihari News: मोतिहारी के सदर अस्पताल में पिछले कई दिनों से रेबीज का इंजेक्शन और इम्यूनोग्लोबुलिन गायब है, जिससे रोजाना 30 से 40 कुत्ते के काटने से घायल मरीज बिना इलाज लौट रहे हैं। कई मरीज निजी स्टोरों से महंगे दाम पर दवा खरीदने के लिए मजबूर हैं। गंभीर मरीजों पर इसका गंभीर असर हो रहा है।

Motihari News: मोतिहारी, नसं। सदर अस्पताल में पिछले कई दिनों से रेबीज का इंजेक्शन और इम्यूनोग्लोबुलिन पूरी तरह गायब है। नतीजा यह है कि रोजाना कुत्ता के काटने से घायल होकर पहुंच रहे 30 से 40 मरीज बिना इलाज के ही वापस लौट जा रहे हैं। कई मरीज मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दाम पर दवा खरीदने को विवश हैं। सदर अस्पताल प्रबंधक कौशल दुबे ने बताया कि दवा आपूर्ति एजेंसी को इंजेक्शन के लिए इंडेंट भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक सप्लाई नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि अमूमन हर रोज 30 से 40 लोग कुत्ता काटने का जख्म लेकर अस्पताल आते हैं, जिसमे शहर के लोग अधिक होते हैं। दवा नहीं रहने के कारण उन्हें लौटा दिया जाता है। बताते है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी रेबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म है।
गंभीर मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
सदर अस्पताल चिकित्सकों के अनुसार सिर्फ सामान्य एआरवी ही नहीं, बल्कि गंभीर रूप से कुत्ता काटने पर दिए जाने वाले एंपग्लोबिन इंजेक्शन भी कई महीने से उपलब्ध नहीं हैं। सिर, चेहरा, गर्दन व गहरे घाव वाले मामलों में एंपग्लोबिन देना अनिवार्य होता है। इसके नहीं मिलने से रेबीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सियार के हमले से अब तक 2 की मौत
पताही इलाके में सियारों का आतंक बढ़ गया है। पिछले दिनों सियार के काटने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं है
महंगे दाम पर वैक्सीन खरीदने को मजबूर लोग
पीड़ितों के परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज नहीं मिलने पर उन्हें निजी दुकानों से 350 से 500 रुपये प्रति डोज के हिसाब से इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है। पूरे कोर्स में 4 से 5 डोज लगते हैं। गरीब मरीज इतना खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं, जिस कारण कई लोग आधा-अधूरा इलाज कराकर घर बैठ जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ व बिहार चैप्टर फिजिशियन एसोसिएशन के चेयरमैन डॉक्टर डी नाथ का कहना है कि कुत्ता काटने के 24 घंटे के अंदर टीकाकरण शुरू करना जरूरी होता है। देरी होने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है। साथ ही मेडिकल साइंस के अनुसार पांच डोज इंजेक्शन का पड़ना चाहिये। मगर जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में तीन डोज ही दिया जाता है।


