स्कूल में बेंच-डेस्क और चहारदीवारी नहीं, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

Nov 28, 2025 10:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मोतिहारी
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मोतिहारी के हेनरी बाजार स्थित प्राथमिक विद्यालय में सुविधाओं की कमी है। यहां केवल दो कमरे हैं और बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। विद्यालय का शौचालय जर्जर है और परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। प्रशासन ने समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

स्कूल में बेंच-डेस्क और चहारदीवारी नहीं, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

नगर निगम मोतिहारी क्षेत्र अंतर्गत शहर के हेनरी बाजार दाल पट्टी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति शिक्षा के अधिकार कानून और प्रशासनिक दावों को कटघरे में खड़ा करती है। शहर के बीचों-बीच मुख्य चौराहे पर अवस्थित यह विद्यालय अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। विद्यालय के प्राचार्य मो. अब्दुल्ला ने बताया कि पांच कक्षा के छात्र-छात्राओं के लिए मात्र दो कमरे हैं। उसमें भी एक कमरे में कार्यालय व स्टोर संचालित होता है। विद्यालय में कुल 41 बच्चे नामांकित हैं। इनके पठन-पाठन के लिए प्राचार्य समेत तीन शिक्षक कार्यरत हैं। बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए वर्तमान में एक शिक्षक की प्रतिनियुक्ति भी की गयी है।

जिले की थोक मंडी हेनरी बाजार के बीचो-बीच अवस्थित इस विद्यालय परिसर में चहारदीवारी व मेन गेट तक नहीं है। इस कारण शाम होते ही यह जगह असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। सुबह जब विद्यालय में बच्चे व शिक्षक पहुंचते हैं तो चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। बावजूद इसके न तो प्रशासन की नजर इस ओर जाती है और न ही सामाजिक संगठनों ने कभी इसकी सुधि लेने की कोशिश की। जबकि इस विद्यालय के आसपास कई बस्ती है, जहां से बच्चे यहां पढ़ने रोजाना आते हैं। डेस्क-बेंच नहीं, दरी बिछाकर बैठने की मजबूरी : प्राथमिक विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलती हैं, लेकिन बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था बेहद दयनीय है। यहां डेस्क-बेंच नहीं होने के कारण छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं को जमीन पर दरी बिछाकर बैठना पड़ता है। शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा रखने वाले इन बच्चों को फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर है, जबकि प्रशासनिक अधिकारी इस स्थिति पर मौन साधे हुए हैं। दो कमरे के भवन में संचालित हो रहा विद्यालय : विद्यालय के भवन में कुल दो ही कमरे उपलब्ध हैं, जिसमें कक्षाएं भी चलती हैं और कार्यालय का काम भी होता है। जगह की कमी के कारण अक्सर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इतना ही नहीं, विद्यालय के बाहर प्रवेश द्वार पर बना शौचालय भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इस शौचालय में गंदगी का अंबार लगा है और उसका दरवाजा तक गायब है, जिससे बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के लिए इसका इस्तेमाल असुरक्षित और असुविधाजनक हो जाता है। हालांकि, विद्यालय भवन के अंदर बने शौचालय का इस्तेमाल बच्चे व शिक्षक करते हैं। मेन गेट व चहारदीवारी की मांग : मेन गेट व चहारदीवारी नहीं होने से विद्यालय की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में है। असामाजिक तत्वों की आवाजाही से विद्यालय परिसर गंदगी, नशाखोरी और शरारती गतिविधियों का केंद्र बनने लगा है। स्थानीय लोगों ने कई बार शौचालय और सुरक्षा की मांग उठाई, लेकिन आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि चहारदीवारी, डेस्क-बेंच व अन्य सुविधाओं के लिए कई बार विभाग से ऑनलाइन व ऑफलाइन डिमांड की गयी है। मगर, स्थिति जस की तस है। अब जरूरी है कि इस विद्यालय को सुरक्षा, स्वच्छता, बेंच-डेस्क, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं से युक्त कर बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण दिया जाए।

प्रस्तुति : पराशर प्रभात / विजय कुमार सिंह

बोले जिम्मेदार

जिले के सभी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन सुनिश्चित करने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं। विद्यालय में भवन, चहारदीवारी, डेस्क-बेंच व अन्य सुविधाओं की कमी की जांच टीम भेजकर करायी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। विद्यालय के प्रधानाध्यापक से बातचीत कर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। चहारदीवारी व डेस्क-बेंच के लिए प्रयास किया जाएगा।

-प्रह्लाद प्रसाद गुप्ता, डीपीओ, प्रारंभिक शिक्षा व समग्र शिक्षा

सुझाव

1. विद्यालय में चहारदीवारी और मेन गेट का निर्माण जरूरी है। इससे असामाजिक तत्व विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

2. विद्यालय के मैदान को समतल कराने की जरूरत है। इससे बच्चों को खेलकूद में आसानी होगी। खेलकूद सामग्री भी मिले।

3. इस प्राथमिक विद्यालय में तत्काल डेस्क-बेंच की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को बैठने में सुविधा हो।

4. स्कूल भवन में मात्र दो ही कमरा है। समीप के भवन में कुछ कक्षाओं को शिफ्ट किया जा सकता है।

5. स्कूल के बच्चों के लिए खेलकूद सामग्री व मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इससे बच्चे स्कूल में बने रहेंगे।

शिकायतें

1. विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है। शाम होते ही आसपास के असामाजिक तत्व विद्यालय परिसर में प्रवेश कर जाते हैं।

2. विद्यालय में जगह की कमी है। हमें खेलकूद का अवसर नहीं मिल पाता है। शाम में यहां खेलने में डर लगता है।

3. इस प्राथमिक विद्यालय में डेस्क-बेंच नहीं है। इससे पढ़ाई में दिक्कत होती है। जमीन पर बैठना मजबूरी है।

4. स्कूल में मात्र दो ही कमरा है। क्लास रूम में बच्चों के बैठने के लिए जगह कम पड़ जाती है। उन्हें बरामदे में बैठना पड़ता है।

5. ठंड के मौसम में बच्चों को जमीन पर दरी बिछाकर बैठना पड़ता है। कई बार तो बरामदे में बैठाया जाता है। ठंड में दिक्कत होती है।

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