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जिले की12 विस सीट पर आधी आबादी की घटी हिस्सेदारी

जिले की12 विस सीट पर आधी आबादी की घटी हिस्सेदारी

संक्षेप: पूर्वी चम्पारण जिले में सभी 12 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इस चुनाव में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 8 प्रतिशत है, जबकि पुरुष प्रत्याशियों का दबदबा 92...

Sat, 25 Oct 2025 07:23 AMNewswrap हिन्दुस्तान, मोतिहारी
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मोतिहारी,हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्वी चम्पारण जिले के सभी 12 विधानसभा सीट पर राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। नामांकन पत्र दाखिल कर प्रत्याशी चुनाव ए जंग में हैं। इन विधानसभा क्षेत्र में पुरुष प्रत्याशियों का दबदबा कायम है। आधी आबादी की हिस्सेदारी इस चुनाव में घटा दी गयी है। बारह विस में मात्र दो विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसमें जदयू ने केसरिया सीट से शालिनी मिश्रा व राजद ने मधुबन सीट से संध्या रानी को चुनाव मैदान में उतारा है। यानी इस विधानसभा चुनाव में जदयू व राजद की महिला हिस्सेदारी 8-8 प्रतिशत रह गयी है।

जबकि पुरुष प्रत्याशी की भागीदारी 92 प्रतिशत है। उक्त दो विधानसभा सीटी के अलावा अन्य तीन विस से तीन महिला उम्मीदवारों ने निर्दलीय पर्चा भरा है। अन्य दलों ने महिला प्रत्याशियों को नहीं दिया तव्वजो : इस विधानसभा चुनाव में जदयू व राजद को छोड़ किसी भी दल ने महिला प्रत्याशियों को तव्वजो नहीं दिया है। भाजपा, कांग्रेस, जनसुराज, सीपीएम, सीपीआई आदि दलों के द्वारा इस बार विस चुनाव में महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका नहीं दिया है। महिला सशक्तीकरण के सभी करते हैं दावा : यूं तो हर राजनीतिक दल महिला सशक्तीकरण का दावा करते रहते हैं। लेकिन जब इनकी भागीदारी की बारी होती है तो हाथ खींच लेते हैं जिसका उदाहरण इ स विधानसभा चुनाव में साफ दिख रहा है। पंचायती राज व्यवस्था के तहत मिला है आरक्षण : पंचायत राज व्यवस्था के तहत होनेवाले चुनाव में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल रहा है। आधी आबादी इसमें हिस्सेदारी लेकर समाज सेवा कर रही हैं। लेकिन विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं के सीट आरक्षित नहीं होने से इनकी हिस्सेदारी मनोनकुल नहीं मिल पा रही है। इससे महिलाएं अपने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत होनेवाले विस चुनाव में अपने को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। जबकि सरकार बनाने में आधी आबादी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। चुनाव में महिला वोट के लिए हर पार्टी तरह तरह के दावे करने में पीछे नहीं हैं। लेकिन हिस्सेदारी की नौबत आने पर राजनीतिक दल के एजेंडे से महिलाओं की चर्चा अनसुनी कर दी जाती है।