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30 नवंबर, 2020|11:48|IST

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सड़क के अभाव में रेलवे लाइन को पार कर स्कूल आती-जाती हैं छात्राएं

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शहर का एकमात्र बालिका उच्च विद्यालय आज भी अपने तारणहार का टकटकी लगाए इंतजार कर रहा है। दशक बीत गये किन्तु 3600 छात्राओं के विद्यालय पहुंचने के लिए एक अदद सड़क का निर्माण नही हो सका । जिसपर चलकर शहर की बेटियां अपने सपनों को पंख लगा सकें।

शहर के एकमात्र बाबुलाल साह बालिका उच्च विद्यालय की जहां आज भी दूर दराज के गांवों से अपने सपने पुरे करने के लिए पहुंचती तो हंै मगर विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है। लिहाजा छात्राएं जान हथेली पर रख रेलवे पटरी पार कर स्कूल आती जाती हैं।

47 वर्षों में नहीं बन सकी सड़क

बाबुलाल साह बालिका उच्च विद्यालय में पहुंच पथ के लिए पिछले 47 वर्षों से प्रयास लगातार किया जाता रहा है। विद्यालय के डोनर और समाजसेवी गोपाल साह बताते हैं कि बरसात के दिनों में स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि कई छात्राएं कीचड़ में गिरकर चोटिल हो जाती हैं । कई बार ट्रेन आती देखकर जल्दबाजी में रेलपटरी क्रॉस करने के दौरान गिर पड़ती हंै लेकिन फिर भी इस समस्या के प्रति किसी का ध्यान नहीं है।

कहते हैं शिक्षक

विद्यालय के शिक्षक डॉ. श्रवण मोदी कहते हैं कि इतनी छात्राओं के आवागमन के लिए सड़क का नहीं बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्राओं की समस्या से प्रतिदिन रुबरु होना पड़ता है । वहीं राजेश कुमार यादव कहते हैं कि अगर जनप्रतिनिधियों द्वारा सही प्रयास किया जाता तो 47 वर्षों के बाद स्थिति ऐसी नहीं रहती। विभाग को भी ध्यान देना चाहिए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभागीय उदासीनता के कारण ही ऐसी स्थिति है जिसके कारण 47 वर्षो मे सड़क नहीं बनी। सार्थक प्रयास होना चाहिए।

कहते हैं प्राचार्य

प्राचार्य मृगेन्द्र सिंह कहते हंै कि छात्राओं द्वारा रेल ट्रैक पार कर विद्यालय पहुंचना खतरनाक है जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार विभाग को सूचना भी भेजी गई। मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।

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  • Web Title:In the absence of road girls cross the railway line and come to school