सोशल मीडिया की अवांछित साइटों पर लगे रोक, जागरूक किया जाए
सोशल मीडिया की लोकप्रियता ने शिक्षा और समाज में ज्ञानवर्धन में मदद की है, लेकिन बच्चों पर इसके दुष्प्रभाव भी हैं। अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान रखें और उन्हें सोशल मीडिया के सदुपयोग के लिए जागरूक करें। सही दिशा में उपयोग से बच्चों का करियर संवरेगा।

सोशल मीडिया की लोकप्रियता बढ़ने से समाज को इसका लाभ मिल रहा है। इसके साइट पर विभिन्न तरह के फीचर उपलब्ध होने से यह ज्ञानवर्धन का माध्यम बना है। शिक्षा ,संस्कृति से लेकर सामाजिक व राजनीतिक सूचनाओं का पल भर में जानकारी मिलना सरल बन गया है। लेकिन सोशल मीडिया के साइट पर कई अवांछित फीचर उपलब्ध हैं जो खासकर कम उम्र के बच्चों के मन मस्तिष्क पर गलत प्रभाव डाल रहे हैं। यह बच्चों के करियर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। सोशल मीडिया का अधिक से अधिक सदुपयोग हो और इसके दुरुपयोग से होने वाले नुकसान को कैसे कम किया जाए,इसपर अभिभावक काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।
निजी स्कूल के डायरेक्टर शिवकिशोर सिंह, अधिवक्ता सुभाष सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इससे होने वाले लाभ के बारे में अभिभावकों के द्वारा अपने बच्चों को बताना चाहिए। मोबाइल देख रहे बच्चों पर अभिभावकों को कड़ी नजर रखनी चाहिए । बच्चों को जब यह पता चल जाएगा कि उसके अभिभावक की उसपर निगाह है तो वह भटकेगा नहीं। मोबाइल में क्या देखना है और क्या नहीं उसे अभिभावक के द्वारा बताना भी होगा। डॉ.प्रेम कुमार, जूली कुमारी, अनिमा वर्मा आदि के अनुसार सोशल मीडिया का सदुपयोग हो,इसके लिए बच्चों को जागरूक करना होगा। बच्चों को सोशल मीडिया के सदुपयोग के बारे में जानकारी देनी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन क्लासेज का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। जब बच्चे ऑनलाइन क्लासेज कर रहे हो तो इसपर भी अभिभावक को नजर रखनी होगी। कई बार ऐसा देखा जाता है कि बच्चे ऑनलाइन क्लासेज के बहाने सोशल मीडिया पर उपलब्ध गेम्स देख रहे होते हैं। अभिभावक के पूछने पर उनको गुमराह कर देते हैं। यह लत यदि लग जाए तो बच्चे को इससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। बच्चे चोरी छिपे गेम्स देखने के आदी हो जाते हैं जो उनके करियर के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। आशीष तिवारी, तनोज कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक दर्जन से अधिक रील, गेम्स,चैट जैसे फीचर उपलब्ध हैं, जिसे कम उम्र के बच्चे खेलने लगते हैं। पढ़ाई लिखाई से अधिक इस तरह के साइट पर उपलब्ध फीचर को देख मनोरंजन का साधन बना लेते हैं। जो उनके भविष्य के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है। इसके लिए अभिभावकों को तो कम उम्र के बच्चों के हाथ में मोबाइल देने से बचने की जरूरत है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग से किशोरवय बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कम होने लगती है। शिक्षक के द्वारा स्कूल में दिए गए होम वर्क को करने से टालमटोल करने लगते हैं। क्योंकि उनका कोमल मस्तिष्क सोशल मीडिया के उस साइट पर लगा रहता है। बच्चों को इसके चंगुल से बाहर निकलने के लिए अभिभावकों को खुद आगे आना होगा। इंद्रजीत सिंह,अजीत कुमार आदि के अनुसार अभिभावक को सिर्फ स्कूल में एडमिशन करा देना ही काफी नहीं है बल्कि उनकी रोजमर्रा की रूटीन पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चे कब पढ़ रहे हैं,कब खेलने जा रहे हैं,कब सोने जा रहे हैं। अभिभावकों को घर पर अपने बच्चों के इन सारी गतिविधियों पर ध्यान देना होगा। विद्यार्थियों के मोबाइल में सिर्फ शिक्षा से जुड़े ऐप होनी चाहिए।
प्रस्तुति :ध्रुव नारायण सिंह / विनीत कुमार
सुझाव
1. सोशल मीडिया का बच्चे करें सदुपयोग तो संवरेगा उनका करियर। अच्छे इंसान बनकर वे समाज में अपना नाम कर सकते हैं रौशन।
2. सोशल मीडिया का सही उपयोग करें बच्चे तो मन मस्तिष्क पर पड़ेगा अच्छा असर। इससे सुधरेगा उनका भविष्य।
3. सोशल मीडिया से दूर रहेंगे बच्चे तो पठन पाठन में लगेगा मन। वे पढ़ लिखकर बन सकेंगे अच्छे नागरिक।
4. अभिभावकों को अपने बच्चों पर रखनी होगी कड़ी नजर,तभी वे सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से बच सकेंगे।
5. सोशल मीडिया के साइट पर उपलब्ध गेम्स,रील जैसे लुभावने दृश्य से बच्चे को रहना होगा दूर,तभी बच्चों का होगा बौद्धिक विकास।
शिकायतें
1. सोशल मीडिया का दुरुपयोग किशोरवय बच्चों के करियर के लिए है अधिक नुकसानदेह। बच्चे हो सकते हैं डिप्रेशन के शिकार।
2. सोशल मीडिया का गलत उपयोग बच्चों के मन मस्तिष्क पर डाल रहा कुप्रभाव। बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए चिंता का विषय।
3. सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बच्चों के पठन पाठन पर बुरा असर। इसके कारण पढ़ाई के प्रति कम होती जाती है अभिरुचि।
4. अभिभावक के द्वारा कड़ी नजर नहीं रखने के कारण किशोरवय बच्चों हो रहे हैं सोशल मीडिया के गलत साइट का शिकार।
5. मनोरंजन के लिए बच्चे आ रहे सोशल मीडिया के साइट पर गेम्स जैसे लुभावने दृश्य के चंगुल में।
बोले विशेषज्ञ
मोबाइल पर रिल्स,गेम्स जैसे ऐप संचालन के आदी हो चुके बच्चों का इसके अतिरिक्त अन्य कार्य में मन नहीं लगता है। इससे उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। घर परिवार में अभिभावकों को एक दिन इंटरनेट हॉलीडे घोषित करना चाहिए ताकि बच्चे मोबाइल से दूर रहें। यदि फोन एक घंटे के लिए दें तो इस शर्त के साथ दें कि तीन से चार घंटे स्टडी करना होगा। बच्चों को मोबाइल से ध्यान हटाने के लिए आउटडोर गेम के लिए प्रोत्साहित करें। - डॉ.हेमंत कुमार, कंसल्टेंट साइक्लोजिस्ट, मोतिहारी।
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