
डॉक्टर और कर्मियों की कमी से मरीज परेशान
गोधासहन का स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार हो गया है। डॉक्टरों की बड़ी संख्या के बावजूद, स्वास्थ्य सेवाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। वर्तमान में, विभाग बिना प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के चल रहा है। सिविल सर्जन ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग जानबूझकर परेशानी पैदा कर रहे हैं।
घोड़ासहन। स्वास्थ्य विभाग हालांकि सरकार के उच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण घोड़ासहन का स्वास्थ्य विभाग खुद ही बीमार हो गया है। जिसे खुद इलाज की जरूरत है। डाक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की भारी भरकम संख्या पर बड़ी राशि के खर्च के बावजूद इलाज की बस औपचारिकता पूरी की जा रही है। वर्त्तमान में बिना प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के ही यह विभाग चल रहा है। मुख्यालय में दो एमबीबीस डाक्टरों सहित आठ चिकित्सक यहां पदस्थापित हैं, जिनमें आयुष, यूनानी व होमियोपैथ डाक्टर भी शामिल हैं। दो स्थानीय डाक्टरों को छोड़ सभी डाक्टर सप्ताह में एक दिन दूरदराज के शहरों से आते हैं।
होमियोपैथ व यूनानी डाक्टर भी आश्चर्यजनक रूप से अंग्रेजी दवा लिखते हैं। दांत के डाक्टर भी ओपीडी में बुखार का इलाज करते नजर आ जाते हैं। पांच अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्रों में चार पर डाक्टर पदस्थापित हैं। लेकिन उनका दर्शन भी साप्ताहिक ही होता है। बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के अमवा बाजार स्थित अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र पर भी डाक्टर की प्रतिनियुक्ति की औपचारिकता पूरी कर दी गयी है। नियमित व संविदा सहित कुल 61 एएनएम यहां पदस्थापित हैं । कहते हैं सिविल सर्जन : सिविल सर्जन डॉ. रवि भूषण श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर भी परेशानी उत्पन्न कर रहे हैं । इससे अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी परेशानी हो रही है। उनके द्वारा विभाग को इस सम्बन्ध में लिखा गया है।

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