सड़क किनारे कचरा डंपिंग ने बढ़ाई मुसीबत, दुर्गंध से सांस लेना दूभर
नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था गंभीर संकट में है। कचरा प्रबंधन की कमी के कारण शहर की सड़कों और गलियों में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। घरेलू और चिकित्सा कचरा खुले में फेंका जा रहा है, जिससे दुर्गंध और स्वास्थ्य संकट बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने निगम से स्थायी समाधान की मांग की है।

नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत शहर की स्वच्छता व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। निगम क्षेत्र में कचरा निस्तारण और प्रबंधन की समुचित व्यवस्था नहीं होने से शहर की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) तक खाली पड़ी जमीनों पर खुलेआम कचरा डंप किया जा रहा है। इससे न केवल शहर की सूरत बिगड़ रही है, बल्कि आम लोगों का जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। राजमणि कश्यप, राजीव रंजन, सुरेश कुमार सिंह, मंटु कुमार सिंह, धीरेंद्र श्रीवास्तव, राजू ठाकुर आदि ने कहा कि शहर के कई मोहल्लों, बाजार क्षेत्रों और एनएच किनारे कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
घरेलू कचरे व मेडिकल वेस्ट के साथ-साथ मीट, मछली और मुर्गा के अवशेष खुले में फेंके जा रहे हैं, जिससे आसपास के इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही है। हालात यह हैं कि सुबह-शाम लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बदबू के कारण दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फुलेना पासवान, नीतीश सरकार, अर्जुन कुमार, नीरज कुमार, कृष्णा कुमार, रोहण कुमार, सुरज कुमार आदि ने कहा कि स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इन कचरे के ढेरों पर पक्षी और आवारा पशु टूट पड़ते हैं। कौए और अन्य पक्षी हड्डी, पंख और मांस के टुकड़े उठाकर लोगों के घरों की छतों पर ले जाकर फैला देते हैं। इससे घरों की छतें गंदी हो रही हैं और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं, आवारा कुत्ते और मवेशी कचरा फैलाकर सड़कों पर जाम जैसी स्थिति उत्पन्न कर देते हैं। इससे आमलोगों को दिक्कत होती है। अजय कुमार गुप्ता, बबलू ठाकुर, दिव्यांशु राज, सोनू सिंह आदि ने कहा कि शहर के स्टेशन से जानपुल रोड में मुख्य सड़कों के किनारे पुलिया के समीप और घनी बस्तियों के बीच शौचालय का मल गिराया जाना भी एक बड़ी समस्या बन गयी है। इससे न सिर्फ बदबू फैलती है, बल्कि गंभीर बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। नगर निगम की ओर से कुछ दिन पहले यहां कचरा नहीं गिराने से संबंधित बोर्ड भी लगाया गया था। मगर, कुछ दिन बाद ही उसे उखाड़ कर फेंक दिया गया व फिर से कचरा फेंकने का सिलसिला शुरू हो गया है। शहर में स्टेशन से जानपुल चौक के बीच के मीट व मुर्गा के दुकानदार यहीं कचरा फेंकते हैं। साथ ही होटलों का कचरा भी यहीं फेंका जाता है। इससे लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। इस होकर गुजरते समय नाक पर रूमाल रखना पड़ता है। मॉर्निंग वाकर को बहुत दिक्कत होती है। लोगों का आरोप है कि निगम के पास न तो पर्याप्त कचरा संग्रहण केंद्र हैं और न ही वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण की कोई ठोस योजना। कई जगहों पर डोर-टू-डोर कचरा उठाव भी नियमित नहीं हो रहा है, इससे लोग मजबूरन कचरा खाली जगहों पर फेंक रहे हैं। लोगों ने नगर निगम प्रशासन से कचरा प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था की मांग की है। नियमित रूप से कचरा उठाव सुनिश्चित हो, अवैध डंपिंग पर सख्त कार्रवाई हो और कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह शहर के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
प्रस्तुति : पराशर प्रभात, विजय कुमार सिंह
बोले जिम्मेदार
शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर निगम गंभीर है। कुछ स्थानों पर अवैध रूप से कचरा डंप किए जाने और जलाने की शिकायतें मिली हैं, जिस पर कार्रवाई की जा रही है। डोर-टू-डोर कचरा उठाव व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है। मीट, मछली और शौचालय मल के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। जल्द ही शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा।
-डॉ लालबाबू प्रसाद, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोतिहारी
सुझाव
1. हर वार्ड में नियमित डोर-टू-डोर कचरा उठाव सुनिश्चित किया जाए। कचरा संग्रहण के लिए तय स्थान बनाए जाएं।
2. खुले में कचरा फेंकने पर जुर्माना लगाया जाए। मीट-मछली अवशेष के लिए अलग कचरा प्रबंधन व्यवस्था लागू हो।
3. व्यापारियों को निर्देश दिया जाए कि अवशेष ढंककर ही निस्तारित करें। नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हो।
4. शौचालय मल निस्तारण के लिए सुरक्षित और वैज्ञानिक व्यवस्था की जाए। घनी आबादी में मल गिराने पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
5. एनएच और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जलाने पर सख्त रोक लगाई जाए। निगरानी के लिए विशेष टीम गठित की जाए।
शिकायतें
1. नगर निगम द्वारा नियमित कचरा उठाव नहीं होने से लोग मजबूरी में सड़क किनारे कचरा फेंक रहे हैं।
2. खुले में पड़े कचरे से बदबू और गंदगी फैल रही है। इससे लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है।
3. जानवरों के अवशेष खुले में फेंके जा रहे हैं। तेज दुर्गंध से राहगीरों और दुकानदारों को परेशानी होती है।
4. मीट-मुर्गा के अवशेषों को पक्षी घरों की छतों पर फैला देते हैं। संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
5. शहर की बस्तियों के बीच शौचालय की गंदगी गिरायी जा रही है। इससे वातावरण दूषित हो रहा है। स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है।
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