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प्रखंड सहायक रहते मार ली बाजी

प्रखंड सहायक रहते मार ली बाजी

क्लर्क से यूपीएससी की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता अर्जित करने वाले शहर के अम्बिकानगर निवासी अजित कुमार के संघर्ष की कहानी किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं है। प्रखंड सहायक की नौकरी के दौरान जब संपन्न लोगों को बीपीएल सूची में नाम जोड़वाते देखा तो विचलित हो गरीब व वंचित लोगों को हक दिलाने के लिए सक्षम अधिकारी बनने की ठान ली। तभी उन्हें पिता के सपनों की याद आयी। वे दोनों पुत्रों को बड़ा अधिकारी बनाना चाहते थे। बड़े भाई अरविन्द प्रसाद ने 2013 में बीपीएससी की परीक्षा पास की। वे शेखपुरा में सहायक जेलर हैं। रघुनाथ प्रसाद व शांतिदेवी की चार संतानों में सबसे छोटे अजित ने चौथे प्रयास में यूपीएससी में सफलता प्राप्त की। अजित बताते हैं कि असफलता उन्हें कभी विचलित नहीं कर पायी। इसे गुरु मान उससे उन्हें सीखने व आगे बढ़ने का मौका मिला। प्रखंड कृषि पदाधिकारी पिता रघुनाथ प्रसाद की 2002 में मृत्यु के बाद उन्होंने बखूबी पारिवारिक दायित्व का भी निर्वाहन किया। 2006 में पिता की जगह अजित को अनुकम्पा पर मझौलिया प्रखंड में सहायक के पद पर नौकरी मिली।

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