ताती ततवा अपनी कह की लड़ाई चंपारण की भूमि से लड़ेगा: शत्रुधन दास
मोतिहारी में बिहार पान महादालित को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया। वरिष्ठ नेता ई० हरेन्द्र कुमार ने कहा कि ताती ततवा को अनुसूचित जाति से हटा दिया गया है। उन्होंने 100 इमानदार...
मोतिहारी, निसं। शहर के वी एस मैरेज पैलेस बरियापुर में बिहार पान महादालित को-ऑर्डिनेशन कमिटी की एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता कृष्णा दास पान ने किया। विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए पान समाज के वरिष्ट नेता ई० हरेन्द्र कुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायलय ने ताती ततवा को अनुसूचित जाति से हटा दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ताती ततवा से सबंधित फाइल समाजिक न्याय अधिकारित मंत्रालय भारत सरकार के पास लंबित है। जिस कागज को सामान्य प्रशासन विभाग पटना में भेजवाना है तथा पटना से जवाब सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार को भेजना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गोष्ठी का मुख्य उदेश्य है कि 100 इमानदार लोगों की एक टीम बनाकर ताती ततवा को अनुसुचित जाति की सुविधा बहाल करानी है। वहीं चंद्रहिया के पूर्व मुखिया शत्रुधन दास ने कहा कि हमारी सिर्फ एक ही लड़ाई है वह ताती ततया को पुन: पान की दर्जा प्राप्त हो। जिसके लिए हमें नई दिल्ली समाजिक न्याय आधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार से कागज सामान्य प्रशासन विभाग को भेजते हुए बिहार सरकार उसे पुन: सुधार कर नई दिल्ली भेजे। उन्होंने कहा कि ताती ततवा अपनी हक की लड़ाई चम्पारण की भुमि से लड़ेगा और अंतिम सांस तक अपना अधिकार प्राप्त कर रहेगा। उन्होंने ताती ततवा समाज के भाईयों से अपील करते हुए कहा कि दिगभ्रमित होने की जरूरत नहीं है। संगोष्ठी में अपना विचार रखते हुए अमोद कुमार दास ने कहा कि 10 अक्टूबर को हमलोगों ने डीएम के माध्यम से भारत सरकार व बिहार सरकार तक पुन: ताती ततवा को पान की दर्जा हेतु मेमोरेन्डम दीया था। अगर हमारा हक नहीं मिला तो हमारी लडाई आंन्दोलन का रूप लेगी। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए सदस्य जिला परिषद सदस्य कृष्णा दास पान ने कहा कि आजादी के76 वर्ष बाद भी ताती ततवा को उनके आधिकार से वंचित रखा गया है। अब ताती ततवा जग गया है और अपना अधिकार सरकार से लेकर रहेगा। उन्होने साफ तौर पर कहा कि हमारा आन्दोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार हमे हमारा हक न दे दें। उन्होंने इस बात की ओर ईशारा किया कि कुछ ऐसे लोग भी समाज के नेता बने हुए है जो सिर्फ चेहरा चमकाना चाहते है। उन्हें जाति के विकास तथा आरक्षण पुन: वापस आये इसकी चिन्ता नहीं है। इस मौके पर सभा को समाज सेवी रामभरोस दास, बिगन दास, लालचन दास, मनतोष दास, सुनिल दास, पानालाल दास, रामतपस्या दास, भरदूल दास, रामचन्द्र दास, राजेंद्र दास, रामाकांत दास, रामाश्रय दास, रामबाबू दास आदि मौजूद थे।
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