Bawal for flood relief beaten to death in Chiraiya - बाढ़ राहत के लिए बवाल, चिरैया में सीओ को पीटा DA Image

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बाढ़ राहत के लिए बवाल, चिरैया में सीओ को पीटा

बाढ़ राहत के लिए बवाल, चिरैया में सीओ को पीटा

बाढ़ पीड़ितों में प्रशासन के प्रति आक्रोश गहराता जा रहा है। शुक्रवार को पूर्वी चम्पारण जिले में चार जगह तो सीतामढ़ी में भी बाढ़ पीड़ितों ने प्रदर्शन व बवाल किया। पूर्वी चम्पारण जिले के चिरैया प्रखंड में आक्रोशितों ने सीओ के साथ मारपीट भी की।

चिरैया प्रखंड की रूपहारा पंचायत के लोगों ने क्षेत्र को बाढ़ ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर ढाका-मोतिहारी पथ को पांच घंटे तक नहर चौक के पास जाम कर दिया। सीओ को बंधक बना लिया गया। बाद में आक्रोशित लोगों ने सीओ के साथ मारपीट भी की। इसके बाद कुछ महिलाओं ने ढाका पहुंच कर अनुमंडल कार्यालय, सिकरहना में घुसने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। इसके बाद वहां भी रोड़ेबाजी की गयी। वहीं, सुगौली में प्रखंड के कुछ ही क्षेत्र को बाढ़ ग्रस्त घोषित करने की सूचना पर करीब पांच हजार लोग प्रखंड कार्यालय पहुंचे। उन्होंने सीओ को बंधक बनाते हुए प्रखंड कार्यालय के सामने एनएच जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। तेतरिया प्रखंड की मधुआहावृत पंचायत के लोगों ने भी सीओ के समक्ष प्रदर्शन किया। इधर, रामगढ़वा की मंगलपुर पंचायत के खुगनी गांव के बाढ़ पीड़ितों ने राशन की मांग को लेकर रामगढ़वा कॉलेज चौक के पास करीब चार घंटे तक एनएच जाम कर दिया।इधर, सीतामढ़ी में राहत सामग्री नहीं मिलने व लिस्ट में नाम नहीं होने पर पुनौरा पूर्वी व पश्चिमी पंचायत केलोगों ने सीतामढ़ी-शिवहर एनएच 104 जाम कर दिया। देखें

समझाने पहुंची पुनौरा थाना पुलिस को भी लोगों ने खदेड़ दिया। वे वरीय अधिकारी को बुलाने की मांग कर रहे थे। बाद में डुमरा सीओ समीर शरण ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच आक्रोशितों को समझाया। फिर स्थानीय मुखिया को बुलाया गया। आक्रोशितों के साथ सीओ ने वार्ड में घूमकर स्थिति का जायजा लिया। मुखिया को दोबारा लिस्ट को संशोधित करते हुए अनुश्रवण समिति को भेजने को कहा। तब जाकर लोग माने।

आक्रोशित प्रदीप चौधरी ने बताया कि हमलोग बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गये। लेकिन, आजतक राहत सामग्री के नाम पर कुछ नहीं मिला। राकेश सदा ने बताया कि 2017 में बाढ़ आयी थी, जिसमें दोनों पंचायत के सैकड़ों लोग प्रभावित थे। लेकिन, बहुत कम संख्या में ही लोगों को राहत राशि मिली। इसबार भी उसी आधार पर मुआवजा वितरण की बात कही जा रही है। नाम जोड़ने से इंकार कर दिया गया। काला देवी ने बताया कि तीन दिन से पूरा घर डूबा है। खाना-पीना भी नसीब नहीं है। सरकारी स्तर पर कोई अन्य सुविधा नहीं दी गयी है। जनप्रतिनिधि भी अबतक कोई खैर-खबर लेने नहीं आया है। रामएकबाल ने बताया कि हमलोग रोज मजदूरी कर खाना-पिना के साथ जीवन यापन करते है। बाढ़ की वजह से मजदूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में सरकारी स्तर की कोई सुविधा हमलोगों को नहीं मिल पा रही है।

मोतिहारी/सीतामढ़ी | हि.टी.

बाढ़ पीड़ितों में प्रशासन के प्रति आक्रोश गहराता जा रहा है। शुक्रवार को पूर्वी चम्पारण जिले में चार जगह तो सीतामढ़ी में भी बाढ़ पीड़ितों ने प्रदर्शन व बवाल किया। पूर्वी चम्पारण जिले के चिरैया प्रखंड में आक्रोशितों ने सीओ के साथ मारपीट भी की।

चिरैया प्रखंड की रूपहारा पंचायत के लोगों ने क्षेत्र को बाढ़ ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर ढाका-मोतिहारी पथ को पांच घंटे तक नहर चौक के पास जाम कर दिया। सीओ को बंधक बना लिया गया। बाद में आक्रोशित लोगों ने सीओ के साथ मारपीट भी की। इसके बाद कुछ महिलाओं ने ढाका पहुंच कर अनुमंडल कार्यालय, सिकरहना में घुसने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। इसके बाद वहां भी रोड़ेबाजी की गयी। वहीं, सुगौली में प्रखंड के कुछ ही क्षेत्र को बाढ़ ग्रस्त घोषित करने की सूचना पर करीब पांच हजार लोग प्रखंड कार्यालय पहुंचे। उन्होंने सीओ को बंधक बनाते हुए प्रखंड कार्यालय के सामने एनएच जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। तेतरिया प्रखंड की मधुआहावृत पंचायत के लोगों ने भी सीओ के समक्ष प्रदर्शन किया। इधर, रामगढ़वा की मंगलपुर पंचायत के खुगनी गांव के बाढ़ पीड़ितों ने राशन की मांग को लेकर रामगढ़वा कॉलेज चौक के पास करीब चार घंटे तक एनएच जाम कर दिया।इधर, सीतामढ़ी में राहत सामग्री नहीं मिलने व लिस्ट में नाम नहीं होने पर पुनौरा पूर्वी व पश्चिमी पंचायत केलोगों ने सीतामढ़ी-शिवहर एनएच 104 जाम कर दिया। देखें

समझाने पहुंची पुनौरा थाना पुलिस को भी लोगों ने खदेड़ दिया। वे वरीय अधिकारी को बुलाने की मांग कर रहे थे। बाद में डुमरा सीओ समीर शरण ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच आक्रोशितों को समझाया। फिर स्थानीय मुखिया को बुलाया गया। आक्रोशितों के साथ सीओ ने वार्ड में घूमकर स्थिति का जायजा लिया। मुखिया को दोबारा लिस्ट को संशोधित करते हुए अनुश्रवण समिति को भेजने को कहा। तब जाकर लोग माने।

आक्रोशित प्रदीप चौधरी ने बताया कि हमलोग बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गये। लेकिन, आजतक राहत सामग्री के नाम पर कुछ नहीं मिला। राकेश सदा ने बताया कि 2017 में बाढ़ आयी थी, जिसमें दोनों पंचायत के सैकड़ों लोग प्रभावित थे। लेकिन, बहुत कम संख्या में ही लोगों को राहत राशि मिली। इसबार भी उसी आधार पर मुआवजा वितरण की बात कही जा रही है। नाम जोड़ने से इंकार कर दिया गया। काला देवी ने बताया कि तीन दिन से पूरा घर डूबा है। खाना-पीना भी नसीब नहीं है। सरकारी स्तर पर कोई अन्य सुविधा नहीं दी गयी है। जनप्रतिनिधि भी अबतक कोई खैर-खबर लेने नहीं आया है। रामएकबाल ने बताया कि हमलोग रोज मजदूरी कर खाना-पिना के साथ जीवन यापन करते है। बाढ़ की वजह से मजदूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में सरकारी स्तर की कोई सुविधा हमलोगों को नहीं मिल पा रही है।

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