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20 सितम्बर, 2020|2:46|IST

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छह हजार हेक्टेयर में लगेगी वैकल्पिक फसल

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जिले में अतिवृष्टि व बाढ़ से धान फसल को बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई है। धान की खेती के बाद फसल जवां भी नहीं हुई थी कि अतिवृष्टि व बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी। किसान टकटकी लगाए रहे कि बाढ़ का पानी हटेगा तो धान की फसल बचेगी।

इसके बावजूद किसानों को इस साल अतिवृष्टि व बाढ़ से बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। किसानों की इसकी भरपाई के लिए कृषि विभाग ने सर्वे कराकर वैकल्पिक फसल के लिए सूची बनायी है। जिले में 17 प्रखंड पूर्ण रुप व 10 प्रखंड अतिवृष्टि व बाढ़ से प्रभावित थे। जिले में 6 हजार हेक्टेयर में वैकल्पिक फसल की योजना बनायी गयी है। जिसमें तोरी, सरसों व मूली की खेती शामिल है। डीएओ चंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में वैकल्पिक फसल के लिए चयन किया गया है। सरकार को रिपोर्ट भेजी गयी है। सरकार से स्वीकृति मिलने पर किसानों का चयन कर इसे मुहैया कराया जाएगा।

बाढ़ का पानी हटने के बाद सब्जी की खेती करने में जुटे हैं किसान: मधुबन। बाढ़ व आफत की बरसात ने इस क्षेत्र की खेती पर बर्बादी की लकीरें खींच दी है। करीब 55 सौ हेक्टेयर में लगी धान,659 हेक्टेयर में लगी मक्का व 884 हेक्टेयर में लगी सब्जी की खेती को बाढ़ व बरसात से क्षति पहुंची है। करोड़ों रुपये की फसल को बाढ़ ने लील लिया है। रबी का सीजन नहीं होने से किसान चाहकर भी रबी की खेती के लिए खेतों को तैयार करने के प्रति तत्पर नहीं दिख रहे हैं। किसान अशोक कुमार सिंह,शिवनाथ यादव,विनोद कुमार गुप्ता,सत्यनारायण भगत,नेसार अहमद आदि बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में सब्जी की खेती होती है। उन क्षेत्रों के सब्जी उत्पादक किसान खेतों से पानी हटने के बाद गोभी, बंदा गोभी, बैगन, चेंच, परवल, मूली आदि फसलों की खेती केे लिए खेतों की जुताई शुरू कर दी है। 30 प्रतिशत किसान सब्जी की खेती पर निर्भर हैं। 70 प्रतिशत किसान धान,मक्का व गेहूं खेती करते हैं।

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  • Web Title:Alternative crop will be grown in six thousand hectares