Hindi NewsBihar NewsMotihari News150th Anniversary of Vande Mataram Celebrated with Seminar in Bihar
वंदे मातरम राष्ट्रीय एकता का प्रतिरूपक है: धीरेंद्र

वंदे मातरम राष्ट्रीय एकता का प्रतिरूपक है: धीरेंद्र

संक्षेप: बिहार बटालियन एनसीसी के निर्देश पर महंत शिव शंकर गिरि कॉलेज में वंदे मातरम के 150वीं सालगिरह पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न अतिथि वक्ताओं ने वंदे मातरम के महत्व और इतिहास पर प्रकाश डाला। सभी ने एकता और राष्ट्र की प्रगति के लिए योगदान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Wed, 12 Nov 2025 10:27 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मोतिहारी
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अरेराज। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह पर चार चरणों में आयोजित अभियान में बिहार बटालियन एनसीसी के निर्देश पर महंत शिव शंकर गिरि कॉलेज द्वारा सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार की शुरुआत वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के गायन से की गई। कॉलेज के एनसीसी पदाधिकारी डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने कार्यक्रम का संयोजन करते हुए सभी अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम में राष्ट्र की आत्मा बोलती है। इसमें भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता की समुज्ज्वला विद्यमान है। हम सभी को एकता और अनुशासन को ध्येय मानते हुए राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना चाहिए। मुख्य वक्ता डॉ. कुमार रश्मि रंजन ने के वंदे मातरम के ऐतिहासिक परिदृश्य को उद्घाटित किया।

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उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा इसे 7 नवंबर 1875 में लिखा गया और 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे स्वर दिया। अतिथि वक्ता डॉ. मदन कुमार ने कहा कि वंदे मातरम का अर्थ है अपने राष्ट्र को नमन करना। भारतमाता को नमन करना। उन्होंने राष्ट्र के प्रति वंदे मातरम की भूमिका को कैडेट्स के समक्ष रखा। अतिथि वक्ता डॉ. सच्चिदानंद मंडल ने कहा कि सन्यासी विद्रोह के समय वंदे मातरम पहली बार लोकप्रिय हुआ। बीज वक्तव्य देते हुए डॉ. विकास कुमार ने कहा कि वंदे मातरम हमें सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है। हम इस भावना को धारण करते हुए राष्ट्र के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं। अंतिम वक्ता डॉ. हजारी कुमार ने कहा कि हम विभिन्न धर्म और जातियों में बटे हुए हैं। हमें इससे ऊपर उठना होगा।