
SIR में पुरुषों से ज्यादा महिला वोटरों के कटे नाम, बिहार के इन 11 जिलों में लिंगानुपात बेहतर
बिहार विधानसभ चुनाव में महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए तमाम राजनीतिक दल लोकलुभावन घोषणाएं और वायदे कर रहे हैं। एनडीए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाकर 1100 रुपये किया।
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के बाद पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं का अनुपात घट गया है। एसआईआर के पहले (एक जनवरी, 2025) राज्य में प्रति हजार पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या 914 थी। एक अक्तूबर, 2025 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया, जिसमें यह अनुपात घटकर 892 रह गया है। यानी सात माह में बिहार में प्रति हजार पुरुष पर 22 महिला मतदाताओं की संख्या में कमी आयी है।
एसआईआर के दौरान अलग-अलग कारणों के आधार पर मतदाता सूची से 22.74 लाख महिलाओं तथा 15.55 लाख पुरुष मतदाताओं के नाम काटे गये थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भोजपुर जिले को छोड़कर शेष सभी 37 जिलों में महिला मतदाता का लिंगानुपात कम हुआ है।
भागलपुर में प्रति हजार पुरुषों पर सबसे अधिक 939 जबकि लखीसराय और पश्चिमी चंपारण में सबसे कम 872 मतदाता महिलाएं हैं। 12 जिलों का लिंगानुपात औसत 892 से भी कम है। एसआईआर के बाद किशनगंज जिले में सबसे अधिक प्रति 1000 पुरुषों के मुकाबले 63 महिलाएं कम हुई हैं।
जनवरी 2025 में किशनगंज जिले में एक हजार पर 937 महिला मतदाता थी, जो अब 874 रह गयी हैं। इसी तरह, जनवरी के मुकाबले महिलाओं का लिंगानुपात भागलपुर में 43, पूर्णिया में 38, बक्सर में 36 और सीवान में 34 गिरा है। लखीसराय व पूर्वी चंपारण के बाद सीतामढ़ी (873), किशनगंज-शिवहर (874), मुंगेर (875), समस्तीपुर (875), पूर्वी चंपारण (876) में लिंगानुपात सबसे कम है।
जिन 12 जिलों का लिंगानुपात राज्य औसत (892) से भी कम है, उनमें मधुबनी, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सीवान, बेगूसराय, भोजपुर, रोहतास, जहानाबाद, औरंगाबाद शामिल हैं। 11 जिलों का लिंगानुपात 900 से अधिक है। इनमें गया, नवादा, जमुई, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, शेखपुरा, सुपौल, अररिया और भागलपुर शामिल हैं।
11 जिलों में मतदाता लिंगानुपात बेहतर था
जनवरी 2025 की प्रकाशित मतदाता सूची में राजधानी सहित 18 जिलों में महिलाओं का लिंगानुपात 2011 की जनगणना के मुकाबले बेहतर था। इनमें शिवहर, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, बक्सर, जमुई और रोहतास जिले शामिल रहे।
एसआईआर के बाद सिर्फ पांच जिले मधेपुरा, सहरसा, वैशाली, खगड़िया और भागलपुर का लिंगानुपात ही जनगणना 2011 के मुकाबले बेहतर पाया गया है। 2011 की जनगणना के मुताबिक बिहार का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 918 महिलाओं का था। बिहार में तीन महीने तक चले एसआईआर प्रक्रिया के बाद 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया था। इसके मुताबिक राज्य में 7.42 करोड़ मतदाता हैं जबकि एसआईआर से पहले राज्य में 7.89 करोड़ मतदाता थे।
● जनवरी 2025 की तुलना में अक्तूबर 2025 में प्रति 1000 पुरुषों पर 22 महिलाएं घट गयीं
● एसआईआर के दौरान 22.74 लाख महिलाओं के नाम मतदाता सूची से कटे
● भागलपुर में हजार पुरुष पर सबसे अधिक 939 जबकि लखीसराय में सबसे कम 872 मतदाता महिलाएं
● भोजपुर, जहानाबाद, बेगूसराय समेत 12 जिलों का लिंगानुपात राज्य औसत से कम
महिला वोटरों पर दोनों गठबंधनों का जोर
बिहार विधानसभ चुनाव में महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए तमाम राजनीतिक दल लोकलुभावन घोषणाएं और वायदे कर रहे हैं। एनडीए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाकर 1100 रुपये किया। जीविका दीदियों व आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए कई योजनाएं लागू कीं। दूसरी तरफ महागठबंधन ने एक दिसम्बर से महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए देने का वायदा किया है।





