बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना के पैसे लेकर 300 से ज्यादा लोग हो गए गायब, अब तलाश शुरू

Feb 06, 2026 08:32 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान, वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर
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सबसे अधिक पारू में 92 तो दूसरे स्थान पर रहने वाले औराई में 75 ऐसे लाभुक चिह्नित किए गए हैं, जो राशि का उठाव कर ना तो घर बनाया है और ना ही नोटिस का जवाब दे रहे हैं। कटरा में 67 तो गायघाट में ऐसे कुल 65 लाभुकों की पहचान भौतिक सत्यापन के दौरान की गई है।

बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना के पैसे लेकर 300 से ज्यादा लोग हो गए गायब, अब तलाश शुरू

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के 387 लाभार्थी राशि लेकर जिले से गायब हो गए हैं। इन लाभार्थियों ने अभी तक अपने घर का निर्माण शुरू तक नहीं कराया है। अब विभाग इनकी खोज में जुटा हुआ है। इसका पता भौतिक सत्यापन के दौरान तब चला, जब कर्मचारी उनके दिए गए पते पर पहुंचे। गांव और घर में कुछ पता नहीं चलने पर विभाग ने इनके पते पर नोटिस भी भेजा है, लेकिन उसका कोई जवाब अब तक विभाग को नहीं मिला है।

ग्रामीण विकास विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार इनमें से अधिकांश (232 लाभार्थियों) का चयन वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान किया गया था। जबकि 25 प्रतिशत (97 लाभुक) वित्तीय वर्ष 2019-20 में चयनित किए गए थे। शेष 15 प्रतिशत लाभुक 2018-19 और उससे पहले के वित्तीय वर्ष में सूचीबद्ध किए गए थे। इनमें सबसे अधिक लाभुक पारू, औराई, कटरा और गायघाट प्रखंडों से हैं। इन प्रखंडों में ऐस लाभुकों की संख्या कुल गायब लाभुकों का तीन चौथाई से अधिक यानी 77.26 फीसदी (299 लाभुक) है।

सबसे अधिक गायब लाभुकों की संख्या पारू प्रखंड में

सबसे अधिक पारू में 92 तो दूसरे स्थान पर रहने वाले औराई में 75 ऐसे लाभुक चिह्नित किए गए हैं, जो राशि का उठाव कर ना तो घर बनाया है और ना ही नोटिस का जवाब दे रहे हैं। कटरा में 67 तो गायघाट में ऐसे कुल 65 लाभुकों की पहचान भौतिक सत्यापन के दौरान की गई है। इस सूची के शेष 88 लाभुक सकरा, मड़वन, बंदरा, साहेबगंज, कुढ़नी, मीनापुर और मोतीपुर प्रखंडों के हैं।

50 से अधिक लाभुकों की हो चुकी है मृत्यु

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इनमें से करीब 32 प्रतिशत (124) लाभुकों के काम की खोज में किसी और प्रदेश में पलायन करने की बात सामने आई है। जबकि 50 से अधिक लाभुकों की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन उनका नाम सूची से विलोपित नहीं किया जा सका है। वहीं डीआरडीए निदेशक संजय कुमार ने बताया कि नोटिस का जवाब न देने के कारण, विभाग से अब इन लाभार्थियों का नाम सूची से नाम हटाने और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। साथ ही राशि की रिकवरी के लिए एफआईआर और उचित कानूनी कार्यवाही को लेकर भी पहल शुरू की गई है।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें