बिहार में बढ़ेगी MP-MLA सीट; 60 लोकसभा सांसद, विधानसभा में 365 विधायक; एक तिहाई महिला होंगी!
Bihar Lok Sabha Assembly Seat Increase: केंद्र सरकार विधानसभा और लोकसभा में 50 फीसदी सीट बढ़ाकर महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। ऐसा होने पर बिहार से 60 लोकसभा सांसद और विधानसभा में 365 विधायक चुने जा सकते हैं।

Bihar Lok Sabha Assembly Seat Increase: बिहार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा की राजनीति करने दिल्ली जाने को तैयार सीएम नीतीश कुमार की राजनीति का केंद्र रही महिलाओं के लिए 2029 के लोकसभा चुनाव और 2030 के विधानसभा चुनाव में बड़ी भागीदारी का मौका बनता दिख रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से विधायिका में महिला आरक्षण कानून को लागू करने के मिजाज में है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सहयोगी और विपक्षी दलों से महिला आरक्षण लागू करने के तौर-तरीकों पर चर्चा शुरू कर दी है। बैठक में सरकार की तरफ से प्रस्ताव दिया गया है कि पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन के जरिए 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा में सदस्यों की संख्या को 50 परसेंट बढ़ाकर उसमें एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाए।
सरकार की तैयारी तो यह है कि अगर पक्ष-विपक्ष के दलों के बीच मोटा-मोटी सहमति बन जाए तो संसद के मौजूदा सत्र में ही महिला आरक्षण कानून में संशोधन पेश कर दिया जाए। मौजूदा कानून में जो व्यवस्था है, उसके मुताबिक अभी शुरू हुई जनगणना के पूरा होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा और तब जाकर महिला आरक्षण लागू हो पाएगा। जब 2023 में यह कानून पास हुआ था, तब विपक्ष के कई नेताओं ने यह कहकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया था कि इसे तत्काल ही यानी 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। सरकार संशोधन के जरिए चालू जनगणना के प्रावधान की जगह 2011 की जनगणना को आधार बना देगी और फिर बाकी काम में तेजी आ जाएगी।
बिहार के 60 लोकसभा सांसद में 20 महिलाएं, विधानसभा के 365 विधायक में 122 औरतें
सरकार की योजना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए। ऐसा होने पर 2029 के आम चुनाव में बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो जाएगी और जीतकर दिल्ली जाने वाले 60 लोकसभा सांसदों में 20 महिलाएं होंगी। इसी तरह विधानसभा के लिए 2030 में होने वाले चुनाव में विधायकों की सीट 243 से बढ़ाकर 365 कर दी जा सकती है। इन 365 विधायकों में करीब 122 औरतें एमएलए बनेंगी।
आरक्षण का फायदा आम महिलाओं को मिल पाएगा या नेताओं के परिवार की चांदी
बिहार में हाल के दशक में महिलाएं और उनमें भी खासकर जीविका दीदियां राजनीति का फोकस रही हैं। महिला आरक्षण होने के बाद उसकी असल परीक्षा इससे होगी कि संसद और विधानसभा में कुछ जीविका दीदी और राजनीतिक दलों में सक्रिय आम आरतें भी पहुंच पाती हैं या बढ़ी हुई सीटों के जरिए स्थापित राजनेताओं के घर की बीवी, बहू और बेटियों की भागीदारी बढ़ जाती है। बिहार से लोकसभा में अभी 5 महिला सांसद हैं और सारी किसी ना किसी नेता की बेटी या पत्नी हैं।
पाटलिपुत्र सीट से लालू यादव की बेटी मीसा भारती, समस्तीपुर से अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी, वैशाली से दिनेश प्रसाद सिंह की बीवी वीणा देवी, शिवहर से आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और सीवान से रमेश सिंह कुशवाहा की पत्नी विजयलक्ष्मी देवी एमपी हैं।
विधानसभा चुनाव 2025 में भी पक्ष और विपक्ष के दलों से नेताओं के परिवार की पूरी फौज जीतकर आई है। मौजूदा महिला सांसदों के भी कुछ रिश्तेदार जीते हैं। मीसा भारती के भाई तेजस्वी यादव तो पार्टी और महागठबंधन के ही नेता हैं। वीणा देवी की बेटी कोमल सिंह और लवली आनंद के बड़े बेटे चेतन आनंद भी विधायक बने हैं। चेतन आनंद की यह दूसरी पारी है। लोकसभा के कई और सांसद हैं, जिनके परिजन विधानसभा चुनाव लड़े और जीते-हारे हैं।


