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बिहार के 217 रेलवे फाटकों पर रेल पुल बनने का रास्ता साफ, खर्च मोदी सरकार करेगी

बिहार के 217 रेलवे फाटकों पर रेल पुल बनने का रास्ता साफ, खर्च मोदी सरकार करेगी

संक्षेप:

बिहार सरकार को कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। अब तक आरओबी बनाने में राज्य सरकार को भी पैसा खर्च करना पड़ रहा था। अभी रेलवे बोर्ड ने 37 आरओबी के डीपीआर को मंजूर कर दिया है, जबकि 115 आरओबी/आरयूबी की डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। यह अनुमोदन की प्रक्रिया में है।

Dec 15, 2025 08:52 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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सफर के दौरान बिहार के लोगों को आने वाले वर्षों में रेलवे फाटक बाधा नहीं बनेंगे। पथ निर्माण विभाग ने राज्य की प्रमुख सड़कों के बीच में आने वाले रेलवे फाटकों पर 217 आरओबी (रेलवे ऊपरी पुल) या आरयूबी (रेलवे अंडर ब्रिज) बनाने का निर्णय लिया है। रेलवे मंत्रालय ने बिहार में आरओबी बनाने की सहमति दे दी है। अब सरकार के स्तर पर आरओबी बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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राज्य सरकार और रेल मंत्रालय के बीच मई 2019 में आरओबी बनाने को लेकर एक करार (एमओयू) हुआ था। उस समय राज्य और रेलवे के बीच बनी सहमति के आधार पर 44 आरओबी बनाने का निर्णय हुआ था। उस समय हुए समझौते के आधार पर आरओबी बनाने की लागत राशि में बिहार सरकार की भी सहभागिता थी। तब हुए समझौते के आधार पर 35 आरओबी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को करना था, जबकि नौ का निर्माण बिहार राज्य पथ विकास निगम के माध्यम से होना था। इनमें अब तक 41 की निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। 38 का काम आवंटित हुआ है। वहीं, तीन आरओबी की निविदा प्रक्रिया चल रही है।

अब पथ निर्माण विभाग के अधीन आने वाली सड़कों के बीच रेलवे फाटकों पर 217 और आरओबी बनाने का निर्णय लिया है। इनमें कुछ स्थानों पर आरयूबी यानी (रेलवे भूमिगत पुल) बनाए जाएंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि सभी आरओबी/आरयूबी बनाने की पूरी लागत केंद्र सरकार ही वहन करेगी। यानी बिहार सरकार को कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। अब तक आरओबी बनाने में राज्य सरकार को भी पैसा खर्च करना पड़ रहा था। अभी रेलवे बोर्ड ने 37 आरओबी के डीपीआर को मंजूर कर दिया है, जबकि 115 आरओबी/आरयूबी की डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। यह अनुमोदन की प्रक्रिया में है।

इन फाटकों पर आरओबी/आरयूबी निर्माण की प्रक्रिया

मंझौलिया-बेतिया, सुगौली-मंझौलिया, जीवधारा-बापूधाम मोतिहारी, कांटी यार्ड, मोतीपुर-महवाल, थलवारा-लहेरियासराय, दरभंगा-मुहमदपुर, दरभंगा-ककरघट्टी, दलसिंहसराय-नाजिरगंज, बरौनी-तेघड़ा, वारिसलीगंज-नवादा, दरभंगा यार्ड, लहेरियासराय-दरभंगा, नारायणपुर अनंत-मुजफ्फरपुर, फुलवारीशरीफ-दानापुर, रघुनाथपुर, डुमरांव-बरूना, सहरसा-पूर्णिया, किऊल-बंशीपुर, नबीनगर यार्ड, समस्तीपुर-कर्पूरी ग्राम, खगड़िया-उमेशनगर, मोहम्मदपुर-कमतौल, बरौनी-तिलरथ, चकिया-मेहसी, मशरख-श्याम कौड़िया, छपरा कचहरी-मढ़ौरा, सीवान यार्ड, सुधानी-बारसोई, कटिहार-दलन आदि।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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