बिहार में मोबाइल से लेन-देन में कमी, एनपीसीआई की रिपोर्ट; साइबर फ्रॉड, यूएस-ईरान युद्ध का असर?
मई 2025 में यूपीआई लेन-देन 3.91 प्रतिशत बिहार में हुआ था। इस माह यूपीआई लेन-देन 98,286 करोड़ रुपये का रहा। वहीं यूपीआई का यह लेन-देन मई 2026 में घटकर 2.43 फीसदी रह गया है।

UPI Payment: बिहार यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) लेन-देन में अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ रहा है। बीते दो वर्षों में मई में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम लिमिटेड (एनपीसीआई) के आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है। मई 2025 में यूपीआई लेन-देन 3.91 प्रतिशत बिहार में हुआ था। इस माह यूपीआई लेन-देन 98,286 करोड़ रुपये का रहा। वहीं यूपीआई का यह लेन-देन मई 2026 में घटकर 2.43 फीसदी रह गया है। इस माह में बिहार में यूपीआई के माध्यम से केवल 73,443 करोड़ रुपये का ही हो सका। मतलब मई 2025 के मुकाबले मई 2026 में 24,843 करोड़ रुपये(1.48 फीसदी) की कमी रही।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स(कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमल कुमार नोपानी कहते हैं कि बीते कुछ वर्षों में जिस तरह साइबर ठगी के मामले बिहार में बढ़े हैं। उसके कारण भी लोग अब यूपीआई के उपयोग को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। बाजार में यूपीआई स्कैनर को लेकर विशेष रूप से सतर्कता बरती जा रही है।
इलेक्ट्रानिक फ्रॉड भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में बड़ी बाधा
वैश्य महासम्मेलन के संयोजक अजय गुप्ता बताते हैं कि वर्ष 2026 में मार्च के बाद ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अप्रैल और मई में युद्ध का असर सर्वाधिक रहा है। इसके कारण भी लेन-देन प्रभावित हुआ है। बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए लोगों ने बड़ी संख्या में अपने पैसे बैंकों से निकाले थे। इसके कारण बाजार में यूपीआई का उपयोग कम हुआ। इसके अलावा इलेक्ट्रानिक फ्रॉड भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में बड़ी बाधा बनकर उभर रहा है। हर किसी को यूपीआई से पेमेंट देने में लोग डरते हैं। खासकर लिंक पर पेमेंट करने में विशेष सतर्कता बरतते हैं।
यूपीआई से लेन-देन करने वालों की संख्या घटी
बीते दो सालों में मई में बिहार में यूपीआई के माध्यम से लेन-देन करने वालों की संख्या में काफी गिरावट आयी है। मई 2026 में बिहार में 52 करोड़ 27 लाख और 80 हजार ‘हिट’ के जरिए लोगों ने यूपीआई के माध्यम से लेन-देन किया था। वहीं, मई 2025 में यूपीआई के जरिए लेन-देन के लिए होने वाले ‘हिट’ की संख्या 67 करोड़ 71 लाख थी। मतलब मई 2026 की तुलना में मई 2025 में 15 करोड़ 43 लाख 20 हजार ‘हिट’ कम हुए।
लोगों का कहना है कि साइबर क्राइम कंट्रोल से यूपीआई पेमेंट में इजाफा हो सकता है। अभी भी साइबर ठगी के अधिकांश मामलों में बदमाश पकड़े नहीं जाते। पैसा अगर चला गया तो अक्सर उसकी वापसी नहीं हो पाती है। इस वजह से लोग अनसेफ यूपीआई पेमेंट करने से बचते हैं।


