मिथिला में 45 किमी लंबी नई रेल लाइन का होगा सर्वे, 50 साल पुरानी मांग को मोदी सरकार की हरी झंडी
मधुबनी से पुपरी वाया बेनीपट्टी 45 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के सर्वे को मोदी सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इस रेलवे ट्रैक की मांग 5 दशक से की जा रही थी। यह रेल लाइन बनने से मिथिला क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बिहार के मिथिला क्षेत्र में 45 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन को मंजूरी दी है। इसके तहत मधुबनी से बेनीपट्टी होते हुए पुपरी तक नई रेल लाइन के लिए सर्वे कराया जाएगा। बेनीपट्टी को बीते 50 सालों से रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग की जा रही थी। केंद्र सरकार के इस फैसले से क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। रेल मंत्रालय के समेकित बजट में 46 प्रस्तावों को मोदी सरकार ने हरी झंडी दी है। इसमें यह परियोजना 30वें नंबर पर है। इस सर्वे पर शुरुआत में 7 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
रेलवे की वेबसाइट पर इस सर्वे की जानकारी 2 अप्रैल की तारीख में अपडेट की गई है। बेनीपट्टी के रेल लाइन से जुड़ने से पूरे मिथिलांचल की सूरत बदल जाएगी। इससे व्यापार और कृषि उत्पादों के परिवहन में आसानी होगी। लोगों के समय और पैसे की बचत के साथ-साथ रोजगार की नई संभावनाएं बनेंगी। रामायण सर्किट से जुड़े इस क्षेत्र में पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा। व्यापारियों एवं किसानों का बड़े बाजारों से सीधा संपर्क स्थापित होगा, देश व विश्व स्तर पर कनेक्टिविटी बनेगी और खुशहाली आएगी।
1974 से उठ रही है बेनीपट्टी को रेल पटरी से जोड़ने की मांग
बेनीपट्टी को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग का लंबा इतिहास रहा है। साल 1974 में तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र ने मिथिला क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के लिए एक प्रस्ताव दिया था, जिसमें बेनीपट्टी था।
साल 1997 में तत्कालीन रेलमंत्री रामविलास पासवान ने जयनगर वाया बेनीपट्टी होते हुए पुपरी तक 45 किलोमीटर का एक नया सर्वेक्षण प्रस्ताव दिया था। बाद में इस प्रस्ताव पर तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी हामी भरी थी। हालांकि, यह प्रस्ताव केवल फाइलों तक सिमटा रहा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
वर्ष 1982 में बेनीपट्टी को अनुमंडल का दर्जा मिलने के बाद रेल कनेक्टिविटी नहीं मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने लगातार आवाज उठाई। सामाजिक कार्यकर्ता कमल कुमार झा ने धरना-प्रदर्शन, साइकिल यात्रा और हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया।
पूर्व मंत्री सह विधायक विनोद नारायण झा ने भी सदन में इस मुद्दे पर आवाज बुलंद की और रेल मंत्री से मुलाकात की। सांसद डॉ. अशोक कुमार यादव और एमएलसी घनश्याम ठाकुर ने भी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का ध्यान इस परियोजना की ओर आकृष्ट कराया था।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


