मंत्री दीपक प्रकाश ने MLC की शपथ ली, बिहार विधान परिषद पहुंच ही गए उपेंद्र कुशवाहा के बेटे
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने गुरुवार को एमएलसी पद की शपथ दिलाई। बिहार के पंचायती राज मंत्री पहली बार किसी सदन के सदस्य बने हैं।

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश एमएलसी बन गए हैं। राज्यपाल द्वारा बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किए जाने के बाद गुरुवार को उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उन्हें शपथ दिलाई। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) चीफ उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पहली बार किसी सदन के सदस्य बने हैं। अब तक वह बिना विधायक या एमएलसी रहे ही मंत्री पद पर काबिज थे, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया था। पिछले सप्ताह भाजपा एमएलसी देवेश कुमार ने इस्तीफा देकर दीपक के लिए सीट छोड़ दी थी।
दीपक प्रकाश अपने पिता उपेंद्र कुशवाहा के साथ गुरुवार को पटना स्थित बिहार विधान मंडल परिसर पहुंचे। यहां सभापति ने उन्हें विधान परिषद के सदस्य की शपथ दिलाई। इस दौरान बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा और लेशी सिंह समेत अन्य कई नेता मौजूद रहे।
शपथ लेने के बाद मीडिया से बातचीत में दीपक प्रकाश ने कहा कि वह अब दोगुनी ऊर्जा के साथ बिहार और देश के विकास के लिए काम करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत एनडीए के सभी वरीय नेताओं का आभार भी जताया।
देवेश ने दीपक के लिए छोड़ी सीट
भाजपा के एमएलसी रहे देवेश कुमार ने पिछले दिनों विधान परिषद की सदस्यता से अचानक इस्तीफा दे दिया था। वह राज्यपाल द्वारा मनोनीत कोटे से एमएलसी थे। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था, लेकिन उन्होंने 8 महीने पहले ही त्याग पत्र दे दिया। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर देवेश ने दीपक प्रकाश के लिए अपनी एमएलसी सीट छोड़ दी। इस पर सियासत भी गर्माई।
इसके बाद, सम्राट चौधरी सरकार ने देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत करने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने इस पर सहमति दे दी। बुधवार को दीपक के मनोनयन की अधिसूचना भी जारी हो गई।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- मंत्री कैसे बने हुए हैं दीपक प्रकाश
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार सरकार में रालोमो कोटे से मंत्री हैं। पहले वह नवंबर 2025 में तत्कालीन नीतीश कैबिनेट में शामिल हुए थे। फिर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में 7 मई 2026 को वह दोबारा मंत्री बने। दोनों बार बिना विधायक या एमएलसी बने ही दीपक प्रकाश को कैबिनेट में शामिल किया गया।
इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। हाल ही में शीर्ष अदालत ने सम्राट सरकार से तीखा सवाल किया कि दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य रहे इतने लंबे समय से मंत्री पद पर कैसे काबिज हैं? कोर्ट में 27 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई है। इससे पहले ही दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाकर उनका मंत्री पद सुरक्षित कर लिया गया। बता दें कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन के सदस्य रहे अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है।


