Hindi NewsBihar NewsManoj Jha RJD says Ram name not a license for everything accuses dilution of MNREGA rights by Modi Govt in G RAM G Bill
लाइसेंस नहीं नेम, गांधी के हत्यारे के नाम में भी राम था; G RAM G विधेयक पर बोले राजद के मनोज झा

लाइसेंस नहीं नेम, गांधी के हत्यारे के नाम में भी राम था; G RAM G विधेयक पर बोले राजद के मनोज झा

संक्षेप:

आरजेडी एमपी मनोज झा ने नाथूराम गोडसे का नाम लिए बिना कहा कि नाम में राम का होना कई चीजों का लाइसेंस नहीं है। उन्होंने कहा कि जी राम जी बिल से रोजगार को अधिकार की तरह देखने वाले मनरेगा कानून को सरकार कमजोर कर रही है।

Dec 17, 2025 12:15 pm ISTRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना/ नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की जगह लेने के लिए पेश विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 (जी राम जी) का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार का संसद के दोनों सदनों में बहुमत है, इसलिए विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद जी राम जी बिल को कानून बनाने में दिक्कत नहीं होगी। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने जी राम जी बिल नामकरण पर कहा है कि बेतुकी से तुक बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। झा ने नाथूराम गोडसे का बिना नाम लिए कहा कि नाम में राम होना कई चीजों का लाइसेंस नहीं है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

मनोझ झा ने कहा- ‘कांग्रेस ही नहीं, भाजपा के अंदर भी लोग इससे परेशान हैं। एनडीए के लोग भी परेशान हैं। आपने इसका पूरा चरित्र बदल दिया। ये डिमांड ड्रिवेन प्रोग्राम था, कमांड ड्रिवेन कर दिया। केंद्र और राज्य के बीच 90-10 का अनुपात था, 60-40 कर दिया। अधिकार आधारित दृष्टकोण था, उसको खारिज कर दिया। और किस नाम से। जी राम जी। बेतुकी से तुक बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। किसी के नाम में राम होना, कई चीजों का लाइसेंस नहीं होता है। 30 जनवरी 1948 के गुनाहगार (महात्मा गांधी की हत्या) के नाम में भी राम (नाथूराम गोडसे) था। एक योजना जिसने देश को एक सुरक्षा जाल प्रदान किया, बजाय इसके कि आप उसको बलवती बनाते, आप उसकी आत्मा को खत्म कर रहे हैं।’

केंद्र सरकार के प्रस्तावित विधेयक में मनरेगा के 100 दिन के बदले 125 दिन काम का प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि खेती-किसानी के काम में व्यवधान ना आए इसके लिए वह बुआई या कटाई के मौसम में पूरे साल में कुल 60 दिनों तक योजना का काम रोक सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी नहीं होगी, जो समस्या इन दिनों दिख रही है। साल के बाकी 305 दिनों में 125 दिन काम मांगने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है। काम मांगने पर काम नहीं देने की हालत में भत्ता देने वाला प्रावधान जारी रखा गया है, तो अकुशल मजदूरों को 100 के बदले 125 दिन काम मिलना एक फायदेमंद स्थिति है।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। बिहार में दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने के बाद दिल्ली-एनसीआर में विराट वैभव, दैनिक भास्कर, आज समाज, बीबीसी हिन्दी, स्टार न्यूज, सहारा समय और इंडिया न्यूज के लिए अलग-अलग भूमिका में काम कर चुके हैं। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bihar Shapath Grahan, Bihar Election Result 2025, Bihar Chunav Result, बिहार चुनाव 2025 , Bihar vidhan sabha seats , बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स और बिहार चुनाव 2025 की खबरें पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।