नीतीश के खिलाफ मुरेठा बांधने वाला कैसे बना BJP की पसंद, सम्राट के CM बनने की इनसाइड स्टोरी
Samrat Choudhary: बिहार ने उस दौर को भी देखा जब सम्राट चौधरी ने ही नीतीश कुमार को हटाने के लिए मुरेठा बांधा था। लेकिन जब नीतीश कुमार एनडीए में वापस आ गए और सम्राट ने अपना मुरेठा उतार दिया और वह नीतीश कुमार के सबसे प्रिय बन गए।

Bihar New CM Samrat Choudhary: बिहार की राजनीति में आज एक युग का अंत हो गया। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगा दी है। इस औपचारिकता को पूरा करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश क पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा ने पर्यवेक्षक बनाया। शिवराज का नाम जैसे ही सामने आया तो कयासों का बाजार और गर्म हो गया। लोग दूसरे नामों पर भी कयास लगाने लगे। श्रेयसी सिंह के नाम को भी उछाला गया। लेकिन अंतत: सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लग गई।
सम्राट चौधरी के नाम पर भले ही आज औपचारिक तौर पर मुहर लगी हो, लेकिन इसके संकेत 2025 में नई सरकार के गठन के साथ ही मिलने लगे थे। जब नीतीश कुमार ने गृह मंत्रालय पहली बार छोड़ा तो भाजपा ने यह जिम्मेदारी भाजपा ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दी थी। यह ऐसा विभाग है जो अमूमन मुख्यमंत्री के पास ही होता है। अब ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल जरूर है कि राजद से अपनी सियासी पारी शुरू करने वाले सम्राट चौधरी कैसा भाजपा नेतृत्व की पहली पसंद बनकर उभरे।
सम्राट के सीएम बनने की इनसाइड स्टोरी
भाजपा के सूत्रों का की मानें तो बिहार भाजपा की वर्षों से अपनी सरकार यानी की अपना मुख्यमंत्री बनाने की तमन्ना रही है। भाजपा ने अपने इस मकसद को पूरा कर लिया है। सुशील मोदी के निधन के बाद भाजपा को बिहार में एक सक्षम नेतृत्व की तलाश रही है, जो कि पार्टी की विचारधारा पर चलने के साथ-साथ सहयोगियों से समन्वय भी स्थापित करके चल सके। यही कारण है कि 2022 में जब भाजपा-जेडीयू का गठबंधन टूटा तो इसे संभालने वाला कोई नहीं था। इसके बात 2024 में जब दोबारा भाजपा-जेडीयू की सरकार बनी तो भाजपा ने सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपी। सम्राट ने इसे बखूबी निभाया। नीतीश कुमार के साथ उनकी बॉन्डिंग काफी गहरी होती गई। वह उनके पद चिन्हों पर चलते दिखाई दिए। हमेशा साए की तरह साथ रहे। उन्होंने कभी कोई भी ऐसा बयान नहीं दिया जिससे की गठबंधन की गांठ ढीली पर जाए।।
भाजपा ने हार्डलाइनर को क्यों नहीं चुना?
सूत्रों का कहना है कि बिहार राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का वैचारिक और संगठनात्मक जाल देश के विभिन्न क्षेत्रों में फैले 36 से अधिक आनुषंगिक संगठनों के माध्यम से काम करता है। ये संगठन सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, और श्रमिक जैसे क्षेत्रों में हिंदुत्व की विचारधारा के आधार पर कार्य करते हैं। ऐसे में अगर कोई भाजपा का कोर कार्यकर्ता (आरएसएस बैकग्राउंड का) बिहार जैसे राज्य का मुख्यमंत्री बनता तो इसका प्रभाव सरकार के निर्णयों पर दिखता। इससे नीतीश कुमार की पार्टी के लिए असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती और गठबंधन के बीच दरार उत्पन्न हो जाता। यही वजह है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बिहार में कोई नया प्रयोग करने की जगह सम्राट चौधरी को कमान सौंप दी।
बिहार ने उस दौर को भी देखा जब सम्राट चौधरी ने ही नीतीश कुमार को हटाने के लिए मुरेठा बांधा था। लेकिन जब नीतीश कुमार एनडीए में वापस आ गए और सम्राट ने अपना मुरेठा उतार दिया और वह नीतीश कुमार के सबसे प्रिय बन गए। यहां तक कि कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार उन्हें छोड़कर किसी और को मुख्यमंत्री स्वीकार करने को तैयार ही नहीं थे।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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