
महागठबंधन में सबकी सीट घटाने वाला फॉर्मूला; कांग्रेस, मुकेश बने रहे तो RJD 138, बाकी को कितनी?
संक्षेप: बिहार में एनडीए के पांच दलों के बीच सीट शेयरिंग की आज शाम तक घोषणा के ऐलान के बीच लालू यादव और तेजस्वी यादव ने महागठबंधन में बंटवारे का फॉर्मूला भी बना दिया है। कांग्रेस या मुकेश सहनी में कोई भी गठबंधन तोड़ता है तो राजद 138 सीट लड़ेगी।
बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन में सीट बंटवारे की धुरी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू यादव और तेजस्वी यादव ने गठबंधन में आठ दलों के बीच सीट बंटवारे का बेसिक फॉर्मूला बना लिया है। इसके हिसाब से सबको 2020 से कम सीटें मिलेंगी। सीट घटने को लेकर कांग्रेस और उप-मुख्यमंत्री के तौर पर अपने नाम के ऐलान को लेकर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुकेश सहनी अगर किसी भी सूरत में गठबंधन नहीं तोड़ते हैं तो राजद 138 सीट खुद लड़ने और बची 104 सीटों में सबको एडजस्ट करने की तैयारी में है। कांग्रेस और सहनी में कोई अलायंस छोड़ता है तो फॉर्मूले में बदलाव होगा। सब एकजुट रहे तो इसी फॉर्मूले में एक-दो सीट कम-ज्यादा करके सीट शेयरिंग का आज-कल में ऐलान कर दिया जाएगा।

2020 के विधानसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी - मार्क्सवादी लेनिनिवादी (सीपीआई-एमएल), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) चुनाव लड़ी थी। तब राजद को 144, कांग्रेस को 70, सीपीआई-माले को 19, सीपीआई को 6 और सीपीएम को 4 सीट लड़ने मिला था। तब मुकेश सहनी गठबंधन के सीट बंटवारे के ऐलान के दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में चले गए थे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सहनी को अपने कोटे की 11 सीटें दी थीं। अब महागठबंधन में मुकेश सहनी भी लंबे समय से हैं। इन छह के अलावा हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और पशुपति पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) भी सीट मिलने पर शामिल होने को तैयार हैं।
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राजद के फॉर्मूले के मुताबिक वो खुद 138 सीटें लड़ेगी यानी 2020 से 6 सीटें कम। कांग्रेस को 70 से घटकर 57 पर आना होगा। सीपीआई माले को भी 19 के बदले 18 सीट से संतोष करना पड़ेगा। मुकेश सहनी को 16 सीट लड़ने कहा जा रहा है। सीपीआई और सीपीएम को पहले की तरह 6 और 4 सीट दी जा सकती है। बची 4 सीटों में 2-2 सीट झामुमो और रालोजपा की झोली में डाल दी जाएगी। एक चर्चा यह भी है कि लालू यादव ने पशुपति पारस को गठबंधन में लेने के बदले राजद में अपनी पार्टी का विलय करने कहा है। पारस अपने बेटे को अलौली से लड़ाने के लिए परेशान हैं, जहां से राजद के रामवृक्ष सदा मौजूदा विधायक हैं।
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राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच बातचीत में तल्खी बढ़ने की खबर है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है। कहा जा रहा है कि लालू और तेजस्वी ने राजद के नेताओं की आपात बैठक आज बुलाई है और उसमें बिना कांग्रेस के साथ और बिना कांग्रेस के लड़ने की संभावनाओं पर सबका मन टटोला जा सकता है। मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम पद के तौर पर नाम का ऐलान चाहिए, जो कांग्रेस अटका रही है।
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कांग्रेस तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री घोषित करने के खिलाफ भी वीटो लगा बैठी है। कांग्रेस और लालू यादव की बात अगर बिगड़ती है तो महागठबंधन में किसी को ना सीट की कमी होगी और ना सीएम और डिप्टी सीएम का चेहरा बनने में। बातचीत भले राजद के हाथ में हो लेकिन आपसी सहमति से बंटवारा या ब्रेक-अप कांग्रेस के हाथ में दिख रहा है।





