बेनीपट्टी-हरलाखी पथ पर डेढ़ साल से पुल बंद, डायवर्सन पर हो रहे हादसे
मधुबनी जिले के खनुआ टोल पर खनुआ नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर के बाद, विभाग ने बैरिकेडिंग और डायवर्सन मार्ग बनाया। लेकिन यह उपाय सुरक्षित नहीं है और लगातार हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पुल के पुनर्निर्माण की मांग की है, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता है।

मधुबनी । 13 जुलाई 2024 को हिंदुस्तान अखबार में बेनीपट्टी-हरलाखी मुख्य पथ पर तीसीयाही गांव के खनुआ टोल स्थित खनुआ नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। तब जाकर सुस्त पड़ा विभाग सक्रिय हुआ था। सबसे बड़ी बात यह थी कि उस समय जिले के आला अधिकारी इस पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर से अनभिज्ञ थे। खबर छपते ही आनन-फानन में विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पुल के दोनों ओर लोहे की बैरिकेडिंग कराई। र वाहनों के लिए बगल से कच्चा डायवर्सन मार्ग बनाया गया। हालांकि, इस पहल से पुल के ऊपर से गुजरने वाले वाहनों के साथ होने वाले हादसे तो टल गए।
लेकिन सुरक्षा के नाम पर की गई लोहे की बैरिकेडिंग और उबड़-खाबड़ डायवर्सन हादसे का कारण बन गए। तब से अबतक लगातार हादसे हो रहे हैं। लेकिन पुल में आईं दरार की मरम्मत के लिए अब तक काई पहल नहीं की गई है। यह पथ और पुल मार्ग महत्वपूर्ण है। बेनीपट्टी-हरलाखी पथ इस क्षेत्र की प्रमुख सड़कों में से एक है। यह पथ और पुल मार्ग न सिर्फ दो प्रखंडों को अनुमंडल को जोड़ती है। बल्कि अनुमंडल से कई प्रखंड, दर्जनों गांवों और जयनगर अनुमंडल को भी एनएच 227 सड़क से बेनीपट्टी को सीधे जोड़ता है। यह पुल बेनीपट्टी प्रखंड की सीमा पर और हरलाखी प्रखंड के प्रारंभ होने वाली सीमा पर तीसीयाही गांव के खनुआ टोल पर है। इस मार्ग से रोज सैकड़ों वाहन और हजारों लोगों की आवाजाही होती है। लेकिन खनुआ पुल के बीम में दरारें आने के बाद कई सालों से आवागमन ठप है। पुल के नीचे से बनाया गया डायवर्सन काफी खतरनाक है। डायवर्सन से आवागमन करने में चालकों को काफी परेशानी होती है। यहां अक्सर दुर्घटनाएं हो रही है। लोगों के जान से हो रहा खिलवाड़ : अब ग्रामीणों ने इस पुल के पुनर्निर्माण की मांग तेज कर दी है। सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से कहा कि यह सड़क क्षेत्र की लाइफ लाइन है और क्रैक पुल का कार्य नहीं होना लोगों की जान से खिलवाड़ के समान है। यदि जल्द पुल निर्माण की दिशा में पहल नहीं हुई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण अनीस कुमार, अशोक यादव, बृजकिशोर पांडेय, रविन्द्र कुमार यादव, रामचंद्र यादव, गोविंद कुमार शर्मा, अनिल झा, संतोष कुमार मंडल, किशुनदेव यादव, संजय साह, विनीत कुमार यादव, रामसेवक यादव आदि बताते हैं कि यह पुल हरलाखी प्रखंड के जिरौल, बौरहर, साहरघाट, सोनई, खिरहर, हिसार, बरही, हरसुवार, झिटकी, कौआहा, मंगरहटा, हुर्राही, सिसौनी, सोठगांव व उमगांव समेत दर्जनों गांवों को अनुमंडल मुख्यालय से जोड़ती है। इतना ही नहीं, बेनीपट्टी-हरलाखी पथ उमगांव में एनएच 227 सड़क जुड़ी है। जो जयनगर अनुमंडल, सीतामढ़ी एनएच अरबभारत नेपाल सीमा को भी जोड़ती है। इसके बावजूद पुल के कार्य मे उदासीनता लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इसको लेकर सदन में भी आवाज उठाई गई है। यह पुल दो प्रखंडों बेनीपट्टी और हरलाखी को जाेड़ता है।यह मार्ग न केवल अनुमंडल मुख्यालय को जोड़ता है, बल्कि यह पथ उमगांव में एनएच 227 से जुड़ता है, जो जयनगर अनुमंडल और सीतामढ़ी को जोड़ते हुए भारत-नेपाल सीमा तक पहुंच प्रदान करता है। इस पुल से होकर दर्जनों गांवों जिरौल, बौरहर, साहरघाट, सोनई, खिरहर, हिसार, बरही, हरसुवार, झिटकी, कौआहा, मंगरहटा, हुर्राही, सिसौनी, सोठगांव और उमगांव के हजारों लोग प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। सरकार को जल्द से जल्द इस दिशा में पहल करनी होगी। आखिर डायवर्सन मार्ग से कबतक आवागमन होगा। बरसात के समय मे डायवर्सन मार्ग पर गाड़ियां मुश्किल से चढ़ती है। बाइक सवार गिरकर चोटिल हो जाते हैं। बड़े बड़े वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। विभाग का कहना है कि यह कार्य बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के कार्यक्षेत्र में आता है। कागजों की इस अदला-बदली और स्टीमेट बनाए जाने की खानापूर्ति के बीच आम जनता की जान सस्ती हो गई है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग किसी और बड़ी मानवीय त्रासदी का इंतजार कर रहा है? पुल की मरम्मत की बाट जोह रहे निवासी बेनीपट्टी और हरलाखी सीमा के बीचोबीच खनुआ टोल के पास नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त होने 10 साल बाद भी पुल की मरम्मत के लिए लोग इंजतार कर रहे हैं। इस पुल की जगह से इलाका दो भागों में बटा है। पुल से उत्तर हरलाखी प्रखंड की सीमा पड़ती है। जबकि दक्षिण में बेनीपट्टी अनुमंडल है। यह क्षतिग्रस्त पुल अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। अभिशाप बन गई है। नदी पर पहली बार पक्का पुल बना, वो भी कुछ ही सालों में डैमेज हो गया। लेकिन डैमेज कंट्रोल के लिए सरकार ने अभी तक कोई पहल नहीं की। इससे बड़ी आबादी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। आए दिन नदी में बने डायवर्सन पार करने के दौरान जान को जोखिम में डाल कर लोग आवागमन करते हैं। कई बार बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाती है। बरहा गांव के अविषेक झा ने बताया कि इस बात को लेकर पूर्ववर्ती जिलाधिकारी से भी गुहार लगाई गई थी लेकिन आजतक पहल शुरु नहीं हुई।
बोले जिम्मेदार-
पुल की डैमेज स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग के संज्ञान में है। सुरक्षा को लेकर पुल पर बैरिकेडिंग कर डायवर्सन मार्ग बनाया गया था। हाल ही में सदन में भी मैंने प्रश्न पूछा है कि बेनीपट्टी-हरलाखी मुख्य पथ पर पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। जहां कभी भी गंभीर दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। पुल के क्षतिग्रस्त रहने से यातायात में परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार की ओर से उत्तर में कहा गया कि प्रश्नगत उच्च स्तरीय आरसीसी पुल एवं पहुंच पथ हेतु प्राकलन प्राप्त है। संसाधन की उपलब्धता एवं प्राथमिकता के अनुसार अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। - सुधांशु शेखर, विधायक, हरलाखी
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