झंझारपुर: सड़कों पर ट्रैफिक का दंश भीड़ व सुस्त सिस्टम के बीच फंसे लोग
झंझारपुर शहर, जो मिथिलांचल का वाणिज्यिक और प्रशासनिक केंद्र है, आज ट्रैफिक जाम की भीषण समस्या से ग्रसित है। यहां की सड़कों पर वाहनों की भीड़ और अवैध वसूली ने आम आदमी की जीवनयात्रा को कठिन बना दिया है। प्रशासनिक विफलता के कारण लोगों को जाम से जूझना पड़ रहा है(
मधुबनी । मिथिलांचल के वाणिज्यिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विख्यात झंझारपुर शहर आज अपनी ही प्रगति के बोझ तले दबा जा रहा है। शहर का कोई भी कोना, कोई भी चौक और कोई भी गलियारा ऐसा नहीं बचा है, जहां जाम की भीषण त्रासदी ने आम आदमी का जीना मुहाल न कर रखा हो। कहने को तो यह अनुमंडल मुख्यालय है, लेकिन यहां की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। खासकर आरएस से लेकर झंझारपुर के राम चौक तक की सड़क, जो शहर की लाइफलाइन मानी जाती है। अब आम जनता के लिए यहां आवागमन में मुसीबत खड़ी हो रही है।
यह वही पथ है जो एनएच-27 का लिंक पथ होने के साथ-साथ मधेपुर से आने वाले हजारों लोगों को अनुमंडल कार्यालय, व्यवहार न्यायालय और मुख्य बाजार से जोड़ता है। पांच किलोमीटर का सफर और घंटों की प्रताड़ना: आरएस से राम चौक की दूरी महज पांच किलोमीटर है, लेकिन यहां पहुंचना अब किसी युद्ध जीतने जैसा है। इस छोटे से रास्ते में आधा दर्जन ऐसे प्वाइंट बन गए हैं, जहां कदम-कदम पर जाम का पहरा है। पथराही, कैथीनिया अंडरपास, बेहट कोर्ट चौक, लंगड़ा चौक, थाना चौक और राम चौक-ये वे जगहें हैं जहां अक्सर ट्रैफिक की रफ्तार थम जाती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन इस मार्ग से हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, लेकिन सड़क की क्षमता और उस पर बढ़ते अवैध दबाव के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।कैथीनिया अंडरपास: मुसीबत का संकरा 'पाताल': झंझारपुर की ट्रैफिक समस्या में कैथीनिया अंडरपास एक विशेष नासूर बन चुका है। रेलवे लाइन के नीचे बना यह अंडरपास न केवल संकरा है, बल्कि जलजमाव और कीचड़ का स्थाई ठिकाना भी है। जब भी कोई बड़ा ट्रक या बस यहां से गुजरने की कोशिश करती है, तो अंडरपास की संकरी बनावट के कारण दोनों तरफ के वाहन वहीं रुक जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यहां वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं अंडरपास के नीचे जमा हो जाता है, जिससे दोपहिया चालकों और पैदल यात्रियों का दम घुटने लगता है। यहां रोशनी की भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे रात के समय दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।कोर्ट चौक: न्याय की डगर पर 'अन्याय' का कब्जा: कोर्ट चौक शहर का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्र है। यहां व्यवहार न्यायालय, अनुमंडल कार्यालय और कई सरकारी विभाग स्थित हैं। विडंबना देखिए कि जहां न्याय की उम्मीद में लोग आते हैं, वहीं सड़कों पर सबसे ज्यादा अन्याय हो रहा है। इस चौक को टेम्पू और ई-रिक्शा चालकों ने अपना अघोषित मुख्यालय बना लिया है। सवारी बैठाने की होड़ में गाड़ियां सड़क के बीचों-बीच खड़ी कर दी जाती हैं। कोर्ट आने वाले वकील, मुवक्किल और अधिकारी भी इसी जाम का शिकार होते हैं।वसूली का चलता है खेल : शहर में जाम लगने का सबसे बड़ा कारण है वाहनों से होने वाला अवैध वसूली। झंझारपुर के विभिन्न चौक-चौराहों पर अवैध रूप से बस और टेम्पू स्टैंड संचालित किए जा रहे हैं। इन स्टैंडों पर कुछ दबंगों और बिचौलियाें का कब्जा है, जो हर गाड़ी से वसूली करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वसूली के लिए माल ढोने वाली गाड़ियों और यात्री बसों को जहां-तहां खड़ा कर दिया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि यह सब पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे होता है। थाना चौक जैसे संवेदनशील इलाके में भी पुलिस कर्मी जाम खुलवाने के बजाय मूकदर्शक बने रहते हैं, जिससे जनता के बीच प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है। वहीं लोग हर दिन जाम से परेशान हो रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण पर लाखों खर्च फिर भी जाम से हांफ रहा शहर झंझारपुर की सड़कों पर रेंगते वाहन और पसीने से तर-बतर राहगीरों की कतारें केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता प्रमाण हैं। जिस शहर को वाणिज्यिक हब के रूप में विकसित होना था, वह आज अतिक्रमण की गिरफ्त में है। विडंबना देखिए कि सरकारी फाइलों के अनुसार सड़कों के चौड़ीकरण और सुंदरीकरण पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं। लेकिन धरातल पर एक एम्बुलेंस का समय पर अस्पताल पहुंचना आज भी अनिश्चित बना हुआ है। शहर के कैथीनिया अंडरपास और कोर्ट चौक पर व्याप्त अराजकता यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या प्रशासन ने शहर की यातायात व्यवस्था बिचौलियों के भरोसे छोड़ दिया है। जब अवैध स्टैंड के नाम पर सरेआम वसूली होती है और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है, तो जनता का भरोसा सिस्टम से उठने लगता है। बाजार आने वाली महिलाएं हों या स्कूल जाने वाले बच्चे, हर कोई इस डर में जीता है कि कहीं आज का दिन जाम की भेंट न चढ़ जाए। शहर के बुद्धिजीवी के अनुसार केवल अतिक्रमण हटाना ही समाधान नहीं है, जब तक प्रशासन वैकल्पिक पार्किंग और भारी वाहनों के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं करेगा, तब तक स्थिति में सुधार मुमकिन नहीं है। लोगों का मानना है कि विकास की असली चमक झंझारपुर की चमचमाती लाइटों में नहीं,बल्कि उस सुकून में होगी जब एक आम आदमी बिना किसी मानसिक तनाव के अपने घर तक पहुंचना सुनिश्चित कर पाएगा। जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का निदान कबतक करते हैं यह एक सवाल बना हुआ है।
बोले जिम्मेदार- शहर में जाम की समस्या को लेकर प्रशासन गंभीर हैं। सड़क पर अवैध रूप से वसूली करने वालों और स्टैंड संचालकों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही अनुमंडल पुलिस और नगर परिषद के सहयोग से एक संयुक्त अभियान चलाकर सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। अतिक्रमण खत्म होगा तब जाम लगने की समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। प्रयास है कि आम जनता को अपने गंतव्य तक समय पर पहुंचे इस दिशा में हर संभाव प्रयास किया जा रहा है। -कुमार गौरव, अनुमंडल पदाधिकारी

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