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मिथिलांचल में प्रसिद्ध चौठ चंद्र पर्व कल

मिथिलांचल अपनी सभ्यता, संस्कृति व पर्व-त्योहारों की पुनीत परंपरा को लेकर प्रसिद्ध रहा है। वैदिक काल से ही मिथिलांचल में पर्व-त्योहारों की अनुपम परम्परा रही है। इन पर्वों में धार्मिक व ऐतिहासिक मान्यताएं तथा भावनाएं जुड़ी रहती है। यही मान्यताएं हमारी सांस्कृतिक चेतना को अक्षुण्ण रखती है। ऐसे ही पर्वों की सूची में मिथिलांचल का प्रसिद्ध पर्व चौठ चंद्र है। इसे आम बोलचाल की भाषा में चौरचन भी कहा जाता है। भाद्र शुक्ल पक्ष चौठ तिथि को प्रतिवर्ष विधि-विधान के साथ यह पर्व मनाया जाता है। बुधवार 12 सितंबर को यह पर्व है। ऐसी मान्यताएं है कि चौठ चंद्र व्रत की उपासना करने से इच्छित मनोकामना की प्राप्ति होती है। कुछ लोग दरभंगा महाराज द्वारा इस पर्व को शुरू करने की बात कहते हैं। स्कन्द पुराण में भी चौठ-चंद्र पर्व की पद्धति व कथा का वृहत वर्णन किया गया है। यह पर्व सामान्यतः महिलाएं ही करतीं है। अष्टदल अरिपन पर पूजा सामग्रियों को रखकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिपूर्वक पूजा करतीं है। पूजनोपरांत फल व पकवान व दही के साथ नमः सिंह प्रसेन मवधित सिंहो जाम्बवताहतः सुकुमारक मारोदीह तव व्येषस्यमंक मंत्र के साथ चंद्रमा की आराधना की जाती है। तदुपरांत विसर्जन होता है। इस पर्व में शाम के समय उगते चंद्रमा को फल, दही आदि सामग्रियों के साथ दर्शन किया जाता है। पूजा के दौरान शाम का समय बड़ा मनोहारी लगता है।

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  • Web Title:The famous Chauth Chandra fest tomorrow in Mithilanchal