स्वास्थ्य विभाग के लिए टीबी खात्मा बना चैलेंज, 6650 के पार पहुंचा मरीज

Dec 10, 2025 09:36 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी में टीबी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, नवंबर में 6650 मरीज चिन्हित हुए हैं। एमडीआर (मल्टी-ड्रग-रेसिस्टेंट) मरीजों की संख्या भी चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी उन्मूलन के लिए विशेष योजनाएं बनाई हैं, लेकिन जागरूकता और नियमित इलाज की जरूरत है।

स्वास्थ्य विभाग के लिए टीबी खात्मा बना चैलेंज, 6650 के पार पहुंचा मरीज

मधुबनी,नगर संवाददाता। स्वास्थ्य विभाग के लिए टीबी खात्मा एक चैलेंज बनकर रह गया है। मरीज घटने के बजाय हर माह तेजी से बढ़ता जा रहा है। विभागीय तमाम कवायद फेल साबित हो रही है। बीते नवंबर माह के आंकड़े और चौकाने वाले आएं हैं। जनवरी से लेकर नवंबर तक टीबी मरीजों की संख्या 6650 के पार पहुंच चुकी है। हर माह टीबी के सबसे खतरनाक स्टेज एमडीआर मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, जो काफी चिंताजनक है। एमडीआर के मरीज अगर स्वस्थ्य आदमी के सामने छींक भी दे तो वे सीधे एमडीआर के मरीज बन जाएगा। यह आंकड़ा बुधवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान निकलकर सामने आई।

राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तरीय समीक्षा बैठक संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जी एम ठाकुर में हुई। सीडीओ ने बताया कि जिले में जनवरी 2025 से नवंबर 2025 तक टीबी के 6650 मरीज चिन्हित हुए। जिसमें सरकारी संस्थानों से 3789 एवं प्राइवेट संस्थानों से 2861 मरीज चिन्हित हुए नवम्बर माह में टीबी के 549 मरीज चिन्हित हुए, जिसमें प्राइवेट में 311 व सरकारी संस्थान में 231 मरीज चिन्हित किए गए। इसमें एमडीआर के 7 मरीजों की पहचान की गई है। एमडीआर के मरीजों का उपचार 9 माह से 2 साल तक चलता है। उन्होंने बताया कि राज्य के निर्देशानुसार प्रति 1000 पापुलेशन पर 30 लोगों का टीबी का स्क्रीनिंग होना है। जिले के 16 प्रखंड में ट्रूनट मशीन से टीबी की जांच हो रही है। जिले में टीबी मरीज़ों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण यह भी है कि अधिकतर मरीज बीच में ही इलाज एवं नियमित रूप से दवा का सेवन करना छोड़ देते हैं। इसीलिए विभाग द्वारा निक्षय मित्र योजना की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत मरीजों को गोद लिया जाता है। इसके लिए सरकार और विभाग अपने स्तर से पूरी तरह से प्रयासरत है। लेकिन अब एक दूसरे को जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सभी एसटीएस, एसटीएलएल को टीबी मुक्त पंचायत अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष रणनीति के तहत कार्य करने का निर्देश दिया गया। बैठक में डॉक्टर ठाकुर ने कहा कि टीबी (तपेदिक) जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन में जिले में लगातार कार्य की जा रही है। परंतु और अधिक मजबूती के लिए सभी अधिकारियों को फील्ड स्तर पर जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा। बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जी एम ठाकुर,विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि तथा टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। घर-घर संपर्क, पारिवारिक संपर्कों की पहचान जरूरी: डीपीसी पंकज कुमार ने बताया ने कहा कि टीबी उन्मूलन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं उन्होंने सभी फील्ड अधिकारियों से आह्वान किया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य को वर्ष 2030 से पहले प्राप्त करने के लिए टीम भावना से कार्य करें। आशा द्वारा संवेदनशील एवं असुरक्षित जनसंख्या की अद्यतन लाइन लिस्ट नियमित रूप से तैयार की जाए तथा यह सूची प्रखंड स्तर पर उपलब्ध हो। निजी चिकित्सकों से एसटीएस द्वारा प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से संपर्क किया जाए ताकि निजी क्षेत्र में टीबी नियंत्रण गतिविधियों का सशक्त एकीकरण हो सके। घर-घर संपर्क, पारिवारिक संपर्कों की पहचान और जांच पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि किसी भी संभावित टीबी रोगी की पहचान में देरी न हो। टीबी और एचआईवी समन्वय गतिविधियों को और मजबूत किया जाए ताकि इंफेक्शन वाले मरीजों का उपचार समय पर प्रारंभ हो सके। डेटा रिपोर्टिंग और निक्षय पोर्टल अपडेटिंग में शत-प्रतिशत सटीकता लाई जाए।

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