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छठ महापर्व की शुरुआत के महज एक दिन शेष फिर भी कई तालाबों में काम नहीं हुआ शुरू

छठ महापर्व की शुरुआत के महज एक दिन शेष फिर भी कई तालाबों में काम नहीं हुआ शुरू

संक्षेप:

मधुबनी में चार दिवसीय छठ महापर्व से एक दिन पहले नगर निगम के तालाबों की सफाई कार्य में लापरवाही से श्रद्धालुओं में रोष है। स्थानीय लोग खुद सफाई का काम कर रहे हैं। निगम प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल...

Oct 25, 2025 05:54 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मधुबनी
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मधुबनी, निज संवाददाता। चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू होने में अब केवल एक दिन शेष रह गया है, लेकिन नगर निगम क्षेत्र के कई प्रमुख तालाबों में सफाई और मरम्मत कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। यह स्थिति तब है जब छठ पूजा को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम ने पहले से तैयारी शुरू करने के दावे किए थे। शहर के अधिकांश वार्डों में तालाबों की सफाई, कीचड़ निकासी, जलकुंभी हटाने और घाट निर्माण की प्रक्रिया बेहद सुस्त पड़ी है। इससे श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त है। नहाय-खाय से एक दिन पहले कई तालाबों की स्थिति देखकर लोगों में आक्रोश फैल गया और निगम प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठने लगे हैं।

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तालाबों की हालत बदतर होने, निगम प्रशासन के कर्मी व अधिकारी के द्वारा तालाब का जायजा नहीं लेने जाने, प्रतिनियुक्त कर्मी के द्वारा एक दिन भी तालाब के निरीक्षण नहीं किये जाने की वजह से शुक्रवार को अधिकतर तालाब पर स्थानीय लोग विवश होकर अपने अपने तालाब व घाट की सफाई कार्य करने में लग गये। कई तालाबों पर स्थानीय बच्चे अपने घाट का निर्माण शुरू कर दिया है। भच्छी मां तालाब पर बच्चे अपने घाट का खुद निर्माण करते दिखे। नगर प्रबंधक विनय प्रकाश ने बताया कि हर तालाब के लिए कार्ययोजना बनायी गई है और उसके अनुसार काम किया जा रहा है। तालाब का किनारा गंदगी से है पटा हुआ शहर के आरके कॉलेज तालाब की हालत शुक्रवार को काफी खराब दिखी। यह तालाब शहर के बीचों-बीच होने के कारण हर साल सैकड़ों व्रतियों के द्वारा अर्ध्य दिया जाता है। बावजूद इसके, इस बार सफाई नहीं करायी गयी। विवश होकर शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने खुद सफाई का काम पूरा किया। स्थानीय निवासी राजा महतो, कौशल किशोर, नीतेश साह, राजेश कुमार, अशोक, सतीश राय व अन्य ने बताया कि निगम प्रशासन के द्वारा कुछ नहीं किया गया है। खुद पूजा समिति के द्वारा सफाई का काम किया गया है। चूना ब्लिचिंग का छिड़काव किया गया है। यहां पर जो गंदगी है, उसे हटाने के लिए निगम के ट्रैक्टर वाले को कहा गया तो वह भाग गया। कसेरा पोखर घाट बजबजा रहा इसी तरह कसेरा तालाब की हालत भी बेहद चिंताजनक है। यहां छठ घाटों की सफाई के लिए दो दिन से केवल पांच मजदूर को लगाय गया है। जो उंट के मुंह में जीरा के समान साबित हो रहा है। तालाब का घाट गंदगी व कचरा से बजबजा रहा है। पानी का जलस्तर काफी उपर है, जो श्रद्धालुओं के लिए स्नान और पूजा की व्यवस्था भी जोखिम भरा है। वार्ड 11 के दो तालाबों की भी हालत काफी खराब बनी हुई है। पार्षदों के अनुसार, कई बार निगम कार्यालय से संपर्क करने के बावजूद ठेकेदारों की टीम नहीं पहुंची। इस कारण तालाबों में गाद और कचरा जमा है। निगम प्रशासन हुआ फेल, लोगों ने खुद संभाला सफाई का जिम्मा उधर, भच्छी मोहल्ला समेत शहर के अन्य हिस्सों में भी तालाबों और घाट की सफाई कार्य बेदह खराब है। अधिकतर तालाब पर सफाई का महज खानापूरी कर दी गयी है। ऐसे में विवश होकर स्थानीय लोगों ने अपने तालाब की सफाई का जिम्मा खुद संभाल लिया। भच्छी के मां पोखर पर सफाई व घाट नहीं बनाये जाने पर स्थानी बच्चे शुक्रवार को खुद घाट का निर्माण करते हुए दिखे। यह हालत शहर के अधिकतर तालाबों की है। वार्ड 35 में लाल बिहारी पोखर की हालत नारकीय बनी हुई है। निगम प्रशासन कार्य कराये जाने में उदासीन बना रहा। स्थानीय निवासी संजय यादव ने बताया कि निगम प्रशासन की घोषणा इसबार केवल कागज पर सिमट कर रह गया है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।