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1 जनवरी, 2021|12:57|IST

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रेलवे स्टेशन ही बना हुआ है गरीब गुरबों का इस ठंड में सहारा

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गुरुवार रात के 9.40 बजे हैं। रेलवे स्टेशन पर इस ठंड में करीब 50 से अधिक लोग सो रहे हैं। तो कुछ लोग चादर ओढ़कर बैठे हैं। इनमें रेल यात्री नहीं के बराबर हैं। कुछ लोग दिनभर बाजार में घूमकर फेरी लगाने वाले तो कुछ सब्जी वाली है। मुसाफिर खाना एवं प्लेटफार्म नंबर एक पर सीढ़ी से लेकर टिकट घर तक लोग चादर व पॉलीथिन बिछाकर सो रहे हैं। मेन गेट के समीप मुसाफिर खाना में खजौली की अड़हुलिया देवी चादर ओढ़कर सोने की तैयारी कर रही है। पूछने पर बताती है कि सुबह में सब्जी की दुकान लगाना है। ठंड के कारण टेम्पो वाला शाम में ही यहां छोड़ दिया। उनके साथ कुछ और सब्जी बेचने वाली महिला सो रही है। बतायी की रात का खाना अपने साथ घर से लायी है। बाहर में रोड पर सोने से अच्छा है यहां ठंड भी कम लगेगा और पूरी रात लाइट रहती है। सुबह में रेलवे का सार्वजनिक शौचालय में फ्रेस होकर सब्जी बेचने जाएगी। टिकट रूम के समीप राजनगर के बहादुर मंडल है। पूछने पर बताया कि तत्काल में टिकट लेना है। इसलिए शाम में ही आ गये हैं। सुबह में टिकट लेकर घर जायेंगे। वहीं बस स्टैंड में रात करीब 10 बजे अंधेरा पसरा था। कुछ बसें लगी थी। लेकिन एक भी पैसेंजर नहीं था। एक -दो दुकानें खुली थी। एक दुकानदार ने बताया कि अंधेरा व गंदगी के कारण यहां कोई बाहर में नहीं सोता है। यहां से लोग रेलवे स्टेशन पर सोने चले जाते हैं। वहां पूरी रात बिजली रहती है। सफाई भी स्टेशन पर है। पानी व शौचालय की सुविधा रहने के कारण लोग स्टेशन पर सोना पंसद करते हैं। पिछले साल स्टेशन चौक पर रैन बसेरा बना था। इसबार अभी तक रैन बसेरा नहीं बना है।

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  • Web Title:Railway station remains the support of the poor gurus in this cold