नई भूमि मापी व्यवस्था से सीमांकन प्रक्रिया होगी आसान
मधुबनी में भूमि मापी व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नई ऑनलाइन प्रक्रिया लागू की गई है। अब नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आवेदकों को भूमि की स्थिति बतानी होगी, और विवादित मामलों का निपटारा निर्धारित समय में होगा। विशेष मापी महाअभियान 26 जनवरी से 31 मार्च तक चलेगा।

मधुबनी, निज संवाददाता। भूमि मापी व्यवस्था को सरल पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था सात निश्चय तीन के तहत ईज ऑफ लिविंग के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब भूमि मापी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी जिससे आम लोगों को बार बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए डीएम आनंद शर्मा ने विभागीय प्रावधान के अनुपालन का आदेश सभी संबंधित अधिकारियों को दिया है। इस नई व्यवस्था में आवेदक को सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
आवेदन के समय यह बताना होगा कि भूमि अविवादित है या विवादित। यदि भूमि विवादित है तो अंचलाधिकारी द्वारा विवाद की प्रकृति तय की जाएगी। विवाद में स्वामित्व से जुड़े मामले पारिवारिक बंटवारे चौहद्दी विवाद अतिक्रमण तथा न्यायालय में लंबित वाद शामिल होंगे। भूमि मापी के लिए शुल्क किया गया निर्धारित भूमि मापी शुल्क ग्रामीण क्षेत्र में प्रति खेसरा पांच सौ रुपये और शहरी क्षेत्र में प्रति खेसरा एक हजार रुपये तय किया गया है। तत्काल मापी के लिए यह शुल्क दोगुना होगा। आवेदन के बाद चौहद्दीदारों को स्वत: नोटिस जारी किया जाएगा और निर्धारित समय सीमा के भीतर अमीन द्वारा मापी की जाएगी। मापी के बाद प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन अपलोड करना होगा। तय अवधि में मामले का करना होगा निष्पादन विवादरहित मामलों में मापी की प्रक्रिया कुल ग्यारह दिन में और विवादित मामलों में सात दिन में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि दोनों ही स्थितियों में आवेदन की तिथि से चौदहवें दिन तक मापी प्रतिवेदन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सरकार ने लंबित मामलों के निपटारे के लिए 26 जनवरी से 31 मार्च तक विशेष मापी महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस दौरान विशेष सर्वेक्षण अमीनों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। पूरे अभियान की जिम्मेदारी जिला समाहर्ता के पास होगी। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से भूमि विवाद कम होंगे और लोगों को समय पर न्याय मिलेगा।

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