
कला का संरक्षण और कलाकारों को मजबूत बनाने की कवायद
मधुबनी में राष्ट्रीय हस्तकरघा सप्ताह का शुभारंभ हुआ। सहायक निदेशक बीके झा ने कहा कि यह क्षेत्र कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है। इस सप्ताह का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं का संरक्षण और कारीगरों को सशक्त बनाना है। 8 से 14 दिसंबर तक आयोजित कार्यक्रमों में प्रशिक्षण, प्रदर्शनी और संवाद शामिल हैं।
मधुबनी। राष्ट्रीय हस्तकरघा सप्ताह कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए हस्तशल्पि विभाग के सहायक निदेशक बीके झा ने कहा कि कृषि के बाद हस्तकरघा क्षेत्र ही ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सर्वाधिक लोगों को रोजगार मिलता है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा सप्ताह का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करना, कारीगरों को सशक्त बनाना और उन्हें आत्मनर्भिर बनाना है। इन्होंने बताया कि आठ से चौदह दिसंबर तक मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय हस्तकरघा सप्ताह वर्ष 2025 कारीगरों को सशक्त बनाना परंपरा को आगे बढ़ाना विषय पर आधारित है। इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हस्तकरघा और हस्तशल्पि को संरक्षण देना तथा कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
हस्तकरघा सप्ताह के दौरान प्रशक्षिण शिविर, प्रदर्शनी, संवाद कार्यक्रम और प्रमाण पत्र वितरण जैसे आयोजन किए जाते हैं। इन प्रयासों से कारीगरों के आत्मवश्विास में वृद्धि होती है और उन्हें आत्मनर्भिर बनने की दिशा मिलती है। ग्राम विकास परिषद के तत्वावधान में राष्ट्रीय हस्तकरघा सप्ताह के अवसर पर आयोजित गुरु शष्यि हस्तशल्पि प्रशक्षिण कार्यक्रम के तहत तीस प्रशक्षिुओं को दो माह के प्रशक्षिण का प्रमाण पत्र सहायक निदेशक हस्तशल्पि विभाग बीके झा द्वारा वितरित किया गया। कलाकारों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें स्वरोजगार अपनाने, गुणवत्ता सुधारने व बाजार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

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